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Basti News: वाटर हेड टैंक बनाकर भूले, नहीं हुई जलापूर्ति

Wed, 03 May 2023 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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ओडवारा स्टेशन पर बेकार पड़ा पानी टंकी।
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बस्ती। ओड़वारा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए बूंद भर पानी की भी व्यवस्था नहीं है। 2017 में यहां पेयजल आपूर्ति की कवायद छिड़ी तो जरूर लेकिन, वह विभागीय उदासीनता की भेंट चढ़ गई। जिम्मेदार निर्माण कार्य को आधा-अधूरा छोड़ कर भूल गए। कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। छह साल पहले यहां निर्मित ओवर हेड टैंक और पेयजल प्वाइंट जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। जबकि यह अभी उपयोग में भी नहीं आए हैं।
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लगभग दस लाख रुपये की लागत से इस रेलवे स्टेशन पर पेयजल परियोजना को स्वीकृति मिली थी। रेलवे की निर्माण शाखा सीनियर सेक्शन इंजीनियरिंग कार्य (आईओडब्ल्यू) को साल अंदर ही इसे पूरा कर देना था। मगर निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद जिम्मेदार बेपरवाह हो गए। यहां दस हजार लीटर क्षमता का पानी का टैंक, ट्यूबवेल, दोनों प्लेटफार्म पर तीन-तीन टोटियों के दो पेयजल प्वाइंट एवं पाइप लाइन बिछाने का कार्य कराया गया। उम्मीद जगी कि जल्द ही यात्रियों को प्लेटफार्म पर पेयजल की सुविधा सुलभ हो जाएगी। लेकिन न जाने किन परिस्थितियों में अंतिम चरण में निर्माण कार्य ठप हो गया। इसके बाद से ही कार्यदायी संस्था आईओडब्ल्यू ने किनारा कस लिया। नतीजा पेयजल आपूर्ति को कौन कहे, देखरेख के अभाव में ओवर हेड टैंक और पेयजल प्वाइंट जीर्ण-शीर्ण हो गए। दीवारों के प्लास्टर एवं टाइल्स उखड़ने लगे हैं। संवाद

प्रतिदिन 100 से 150 यात्रियों की रहती हैं आवाजाही
- इस स्टेशन पर लोकल यात्रियों की आवक ज्यादा है। यहां दो प्लेटफार्म हैं और चौबीस घंटे में छह पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव होता है। स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था न होने से यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में लोग एक किलोमीटर दूर ओड़वारा बाजार में जाकर अपनी प्यास बुझाते हैं। यहां तैनात कर्मचारियों को भी पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है। कुछ कर्मचारी पीने योग्य पानी अपने घर से लेकर आते हैं तो कुछ बंद बोतलों का सहारा लेते हैं। शौचालयों में बाहर से पानी लेकर जाना पड़ता है। स्थिति तब और विकट बन जाती है जब यहां किन्हीं कारणों से एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव कर दिया जाता है। इस दौरान अनजान यात्री पानी के लिए प्लेटफार्म पर भटकते रहते हैं।
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नाम का है स्टेशन, सुविधा कुछ भी नहीं
- यह नाम भर का स्टेशन है। यहां सुविधा कुछ भी नहीं है। किसी भी प्लेटफार्म पर पीने का पानी छोड़िए हाथ धोने तक का इंतजाम नहीं हैं। -सत्य नारायण, यात्री
लंबे समय से हम लोग यहां पानी की टंकी और पेयजल प्वाइंट शोपीस के रूप में देखरेख हैं। लेकिन यह चालू नहीं हो सका। -नौशाद अहमद, यात्री
परियोजना निर्माण में गड़बड़झाला साफ दिख रहा है। बिना उपयोग में आए ही ओवरहेड टैंक बदहाल हो गया। यात्री सुविधाओं की किसी को चिंता नहीं है। -अशोक कुमार
परियोजना की स्थापना के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। भारी-भरकम धनराशि खर्च करने के बाद भी परियोजना अनुपयोगी साबित हो रही है।- राजेश कुमार
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मुकम्मल जवाब देने से बचते रहे साहब
- पेयजल परियोजना चालू न होने के सवाल पर जिम्मेदार भी कन्नी काट रहे हैं। आईओडब्ल्यू के इंजीनियर हीरामन प्रसाद ने पहले यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित निर्माण कार्य उनके कार्यकाल के पहले का है। इसलिए उन्हें बहुत जानकारी नहीं है। फिर भी पेयजल आपूर्ति चालू कराने के लिए जल्द निरीक्षण किया जाएगा। निर्माण कार्य में जो कमियां होंगी, उसे दूर करा दिया जाएगा।
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