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Basti News: किसानों की जमीन पर वन विभाग का कब्जा... 12 साल से दौड़ रहे लोग

Sun, 22 Oct 2023 12:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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पैमाइश में निकली 17 बीघा से अधिक अतिरिक्त जमीन, खाली करने से मुकर गया विभाग
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काश्तकार प्रपत्रों के साथ फिर पहुंचे डीएम के दरबार, अपनी जमीन पर मांग रहे कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हर्रैया तहसील क्षेत्र के डमरुआ जंगल के 22 किसानों की 46 बीघा जमीन वन विभाग के जंगल क्षेत्र में लापता हो गई है। किसान अपनी जमीन पाने के लिए 12 साल से दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उनकी जमीन नहीं मिल पा रही है। सात महीने पहले तत्कालीन डीएम के निर्देश पर वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने भूमि की पैमाइश की तो वन विभाग के जंगल क्षेत्र में 17 बीघे से ज्यादा भूमि अतिरिक्त पाई गई। मगर, वन विभाग ने इसे खाली करने से फिर हाथ खड़े कर दिए हैं।
वर्ष 2012 में वन विभाग ने डमरुआ जंगल गांव में जंगल क्षेत्र की जमीन पर कब्जा जमाया। इससे 22 काश्तकार भूमिहीन हो गए। किसानों का कहना है कि जंगल क्षेत्र की जमीन 159 बीघा 6 बिस्वा है। मगर, विभाग का कब्जा 204 बीघा से ज्यादा जमीन पर है। इसमें से 26 बीघा जमीन किसानों की है। इस जमीन पर कई काश्तकारों अपने आवास आदि बनाने के लिए पहले से नींव भी तैयार करा लिए थे।
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वन विभाग ने निर्माण पर रोक लगा दी। बीच-बीच में वन विभाग इस जमीन पर पौधरोपण भी करवाता रहता है। कब्जा का क्षेत्रफल दर्शाकर पौधरोपण में लाखों रुपये का वारा-न्यारा हो गया है। जबकि रोपित किए गए अधिकांश पौधे पुष्पित-पल्लिवत नहीं हो सके हैं। काश्तकार अपनी जमीन के लिए लगातार 12 सालों से दौड़ रहे हैं। कभी भी पैमाइश का मुहूर्त नहीं बना। मार्च 2023 में तत्कालीन डीएम ने संयुक्त टीम गठित कर पैमाइश कराया तो 17 बीघे से अतिरिक्त जमीन वन विभाग के कब्जे में पाई गई। इसकी जियो टैगिंग भी कराई गई।
उम्मीद जगी काश्तकारों को अब उनकी जमीन मिल जाएगी। मगर, वन विभाग ने यह कहकर नया अड़ंगा खड़ा कर दिया कि उनके कब्जे में अतिरिक्त भूमि काश्तकारों के बजाय दूसरे मौजे सिकटा वन क्षेत्र का हिस्सा है। इससे काश्तकार एक बार फिर मायूस हो गए।
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जानिये क्या हैं प्रकरण
तहसील क्षेत्र हर्रैया के डमरूआ जंगल में काश्तकारों और वन विभाग के जंगल क्षेत्र का सम्मिलित गाटा संख्या 241 है। इसका कुल रकबा 204 बीघा 17 बिस्वा 13 धुर है। इसमें राजस्व अभिलेख के अनुसार वन विभाग का कुल रकबा 159 बीघा, 6 बिस्वा 13 धुर है। शेष 45 बीघा 11 बिस्वा भूमि कास्तकारों की है। वन विभाग ने जब अपनी भूमि पर कब्जा जमाया तभी से काश्तकारों की 26 बीघा भूमि पैमाइश करने पर कम पाई गई। इसी के बाद से काश्तकारों और वन विभाग के बीच ठन गई है।
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नहीं मिल पा रही इन किसानों की भूमि
गांव के जटाशंकर, ज्ञानदास, राम लुटावन, रामरूप, छबिलाल, नोखाई, कोदई, नीबार, सरोज कुमार, बिनोद, अमेरिका, परसराम, विश्राम, सीताराम, राम बुझारत, शंभूनाथ , शितानंद, राम कुबेर, अजीत, दिनेश, परमात्मा, दीनानाथ आदि के नाम सम्मिलित गाटा संख्या 241 में दर्ज भूमि नहीं मिल पा रही है। किसानों की मानें तो उनकी भूमि पर वन विभाग का कब्जा है।
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किसान बोले-वन विभाग कर रहा मनमानी
हम लोग लंबे समय से भूमि की पैमाइश के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। इसके लिए वन विभाग तैयार नहीं होता है। बड़े मुश्किल से मार्च 2023 में पैमाइश हुई। वन विभाग के कब्जे में अतिरिक्त जमीन निकली, लेकिन उसे खाली नहीं किया जा रहा है।
शंभूनाथ, काश्तकार
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जिला प्रशासन की पहल पर हुई पैमाइश में 17 बीघा से अधिक जमीन वन विभाग के कब्जे में पाई गई है। मगर, विभाग इस अतिरिक्त भूमि को देने से इन्कार कर रहा है। राजस्व अभिलेख में दर्ज हमारी जमीन को देने की जिम्मेदारी किसकी है यह समझ में नहीं आ रहा है।
कोदई, काश्तकार
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अपनी जमीन पर घर बनाना चाह रहे हैं। वन विभाग ने निर्माण रोकवा कर जमीन पर कब्जा कर लिया है। हम लोगों की सुनने वाला कोई नहीं है। एक बार पैमाइश हो चुकी है, फिर भी वन विभाग ने अड़ंगा खड़ा कर दिया है।
दिनेश कुमार, काश्तकार
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अपनी जमीन लेकर रहेंगे। पैमाइश के बाद भी अतिरिक्त भूमि खाली न करना विभाग की मनमानी है। इससे हम काश्तकारों का काफी नुकसान हो रहा है। अपनी जमीन का सदुपयोग नहीं कर पा रहे हैं। फिर से डीएम से गुहार लगाई गई है।
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छविलाल, काश्तकार
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कोट
डमरूआ जंगल में भूमि पैमाइश में निकली अतिरिक्त जमीन काश्तकारों की नहीं है। वह दूसरे मौजे सिकटा के वन क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे अधिग्रहण के समय इसमें शामिल कर लिया गया था। विभाग के कुछ जमीन का अमलदरामद भी नहीं हुआ है। इस आशय का रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दिया गया है।
-नवीन कुमार शाक्य, डीएफओ
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