सेल्हरा के शिष्य तपस्यानंद के अपहरण का लालगंज थाने में दर्ज है केस
बिहार के आश्रम में 21 महीने तक बंधक बनाकर रखने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बाबा सच्चिदानंद प्रकरण की कलई एक-एक कर खुलती जा रही है। पता चला है कि बाबा ने अनुयाइयों के साथ भी धोखा किया। उसके एक शिष्य तपस्यानंद उर्फ़ श्यामचंद के अपहरण का भी आरोप है। हालांकि, दो साल बाद तपस्यानंद बिहार में साधु के वेश में भटकते मिला था। सेल्हरा आश्रम पर वह इन दिनों रह रहा है। तपस्यानंद का कहना है कि बिहार के आश्रम में उसे जबरदस्ती रखा गया था। मोबाइल फोन वगैरह छीन लिया गया था। घर के लोग मरा मान लिए थे। मां ने लालगंज थाने में अपहरण कर हत्या का केस भी दर्ज करा दिया था।
बाबा की पोल खुलने के बाद अचानक श्यामचंद उर्फ तपस्यानंद और उसकी दो बहनें लापता हो गईं। बाद में बहनें वापस आ गईं। मगर, तपस्यानंद का कहीं पता नहीं चला। लालगंज थाना के सेल्हरा गांव की कमलावती देवी ने नौ मार्च 2018 को पुलिस को तहरीर देकर कहा था कि 30 नवंबर 2017 की शाम सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, उनके सहयोगी दीपानंद, अभेदानंद, कमलाबाई, शीतला बाई, मांडवी, रश्मिबाई, मालती सत्यलोक आश्रम स्थित सेल्हरा आए। उनके बेटे श्यामचंद, बेटी सरोज व बिलायती को यह कहकर साथ ले गए कि बस्ती स्थित आश्रम में इनके साथ ट्रस्ट संबंधी मामलों में कुछ विचार करना है। बे
टियां बाद में वापस आ गईं। मगर, बेटा लौटकर नहीं आया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला। लालगंज थाने में पुलिस ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और साजिश की धारा में सच्चिदानंद और उनके सहयोगियों पर केस दर्ज किया। पुलिस ने इस मामले में चार साध्वियों को जेल भेजा था। परिवार के लोगों ने मान लिया था कि बाबा ने उसकी हत्या करवा दी है।
21 महीने बाद अचानक तपस्यानंद के बिहार के शेखपुरा में कुछ साध्वियों के साथ साधुवेश में जिंदा मिलने की खबर आते ही मामले में नया मोड़ आ गया। श्यामचंद का कहना है कि उसे जबरदस्ती रोका गया था।
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पूरे परिवार को शीशे में उतार लिया था बाबा
एपीएन पीजी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सेल्हरा के श्यामचंद्र चौधरी बाबा सच्चिदानंद के संपर्क में आ गए थे। इसके बाद बाबा श्यामचंद्र के घर आने-जाने लगा। धीरे-धीरे उसने पूरे परिवार को अपना मुरीद बना लिया। श्यामचंद के ऊपर बाबा का ऐसा जादू चला कि वह भी संन्यास लेकर तपस्यानंद बन गया। उसकी चार बहनें भी साध्वी बन गईं। कुनबा बढ़ता देखकर बाबा सच्चिदानंद ने आश्रम बनाने के लिए जमीन मांगी तो परिवार के बुजुर्ग बहकावे में आकर आश्रम के लिए जमीन दे दी। बाबा ने गुमराह करके आश्रम की जमीन को अपने नाम करा लिया। पक्का निर्माण होने के बाद यहां करीब 50 की संख्या में साध्वियां आकर रहने लगीं। इच्छानुसार बाबा भी आता था। ऐसे में बाबा की गतिविधियों पर लोगों को शक होने लगा। आसपास के लोग बताते हैं कि कभी भी हम लोगों को आश्रम में नहीं बुलाया गया। न तो कभी यहां कोई धार्मिक अनुष्ठान होते देखा गया। शुरू में आसपास के लोगों ने आश्रम में भक्ति भाव से जाने का प्रयास किया तो उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया।