एसीजेएम प्रथम कारागार का किया निरीक्षण, बदइंतजामी पर मुखर हुए बंदी
महिला बंदियों ने कहा कि उनके बच्चों को समय से नहीं दिया जा रहा दूध
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उमेश यादव शनिवार दोपहर करीब दो बजे जिला कारागार पहुंचे। उन्होंने बैरकों का निरीक्षण किया। कुछ देर तक सबकुछ ठीकठाक रहा, लेकिन जैसे ही समस्याओं पर चर्चा शुरू की अधिकतर बंदी मुखर हो गए। सबसे ज्यादा महिला बंदियों ने जेल की पोल खोली। जज के सामने कहा कि यहां बंदियों से बैठकी मांगी जाती है। यह अदा करने के बाद ही जेल प्रशासन उन पर रहम करता है।
निरीक्षण के दौरान एसीजेएम प्रथम ने जेल से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बंदियों से पूछताछ शुरू की। महिला बंदी इस मसले पर मुखर हो गईं। जेल की चहारदीवारी के भीतर व्याप्त समस्याओं से एक-एक कर पर्दा उठा दिया। महिला बंदियों ने कहा कि उनसे बैठकी मांगी जाती है। न देने पर कई तरह की असुविधा झेलनी पड़ती है।
एक महिला बंदी ने कहा कि वह बीमार है, मगर उसे गर्म पानी नहीं दिया जाता है। इससे उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही है। सुबह-शाम मिलने वाला भोजन भी गुणवत्तापरक नहीं है। मैनुअल के विपरीत भोजन दिया जाता है। एक अन्य महिला बंदी ने कहा कि उनके मासूमों को समय से दूध नहीं दिया जाता। विनती करने पर यदि दूध मिलता भी है तो पर्याप्त मात्रा में नहीं रहता
पुरुष बंदियों ने भी समस्याएं गिनाईं। एक बंदी ने कहा कि उसकी जमानत हो चुकी है। तीन माह से सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इससे उसे अतिरिक्त जेल में रहना पड़ रहा है। कुछ बंदियों ने अपने मुकदमे की पैरवी के लिए निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
न्यायाधीश ने समस्याओं को सुनने के बाद जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर पर भड़क उठे। निर्देश दिए कि बंदियों को हरहाल में जेल मैनुअल के अनुसार भोजन दिया जाए। उनके स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाए। महिला बंदियों को अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं जाएं। यदि दोबारा शिकायत मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।