धान की फसल में लगा बारिश का पानी
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खेत पानी, किसानों के दिल खुशी से भरे
बस्ती। तीन दिन से हो रही बारिश से जहां खेतों में पानी भर गया है। वहीं, सूखे से फसल बर्बाद होने की आशंका में चिंतित किसानों के दिल भी खुशी से भर उठे हैं। किसानों के मुताबिक इस बारिश ने फसल में जान डाल दी है। अब खेतों में फिर से हरियाली लौटे आएगी। कृषि विज्ञानी भी बारिश को हर तरीके से फायदेमंद बता रहे हैं। मंगलवार शाम से बृहस्पतिवार शाम तक जिले में 65 मिली मीटर बारिश दर्ज की गई है।
गौरा निवासी नवोन्मेषी किसान राममूर्ति मिश्रा ने बताया कि बारिश के कारण लागत में कमी आएगी। वहीं, वातावरण पौधों के अनुकूल होने के कारण उनका विकास तेजी से होगा। खेतों में हरियाली लौटने की आस बारिश ने पूरी कर दी है। अब एक बार और फसलों को उर्वरक देने के बाद धान में बालियां निकल आएंगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विनोद बहादुर सिंह बताते हैं कि यह बारिश हर तरीके की फसलों के लिए फायदेमंद है। अभी तक तापमान अधिक होने के कारण पौधे बढ़ नहीं रहे थे। बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। हालांकि अब धान में नए कल्ले तो नहीं निकलेंगे, जो कल्ले हैं उनका विकास बढ़िया होगा। यदि धान की फसल में पत्ता लपेट यानी लीफ फोल्डर जैसी बीमारी का कोई प्रकोप है तो वह बारिश से दूर हो जाएगी। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम विज्ञान डॉ. अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि आगामी 24 घंटे घने बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने को अनुमान है। हवा सामान्य गति से पूर्वी चलने के आसार हैं।
15 से 20 प्रतिशत धान का उत्पादन घटना तय
बारिश से खेतों में भले ही हरियाली लौट आए लेकिन वैज्ञानिक धान का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत घटना तय मान रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक विनोद बहादुर सिंह बताते हैं कि शुरुआती समय में तापमान अधिक होने और बारिश न होने के कारण पौधों से कल्लों का फुटाव कम हुआ और उनका विकास भी प्रभावित रहा। अब बारिश होने के बाद बालियां निकलनी शुरू हो जाएंगे। वे बताते हैं कि इसका असर उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधे पड़ेगा। दाने सुडौल नहीं होंगे और उनकी चमक भी फीकी पड़ जाएगी।