परशुरामपुर क्षेत्र के शृंगीनारी मंदिर में भक्तो की भीड़।
परशुरामपुर। क्षेत्र के पौराणिक स्थल शृंगीनारी में मंगलवार को बुढवा मंगल पर भव्य मेला लगा। माता शांता देवी के दर्जन करने भोर से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। शृंगीनारी में हर मंगलवार को मेला लगता है। लेकिन, आषाढ़ मास के अंतिम मंगलवार को लगने वाले मेले को बुढ़वा मंगल के नाम से जानते हैं। इस दिन यहां गोंडा, अयोध्या, बलरामपुर, बहराइच आदि जिले से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस श्रद्धालु मंदिर परिसर में हलुवा पूड़ी पकवान बनाकर माता शांता देवी को चढ़ाते हैं और सालभर मंगल की कामना करते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इन दिन मनौती के अनुसार श्रद्धालु अपने बच्चों का सिर भी मुंडवाते हैं, दुर्गा सप्तसती, सत्य नारायण कथा का पाठ कराकर बच्चों के दीर्घायु की कामना करते हैं। नव विवाहित जोडे़ शादी का मौर चढ़ाकर सुखी दाम्पत्य जीवन की याचना करते हैं। मेले में महिलाएं और बच्चों ने खूब खरीदारी की। मंदिर के पुजारी जगदंबा बाबा और राजू दास ने बताया कि मान्यता है कि बुढ़वा मंगल को श्रृंगीनारी स्थित मां शांता देवी के दर्शन करने मात्र से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। मेले की सुरक्षा में परशुरामपुर पुलिस मुस्तैद रही।
शृंगीनारी मंदिर का पौराणिक महत्व
परशुरामपुर। रामायण कालीन कथाओं के अनुसार, जब अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति की इच्छा हुई तो उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए शृंगी ऋषि से मखौड़ा धाम में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ संपन्न होने के बाद शृंगी ऋषि अपनी पत्नी शांता देवी के साथ इसी स्थान पर रुके। कालांतर इस स्थान को शृंगीनारी के रूप में ख्याति मिली।
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