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Basti News: हाई बीम, लेजर लाइट से चौंधिया रहीं आंखें, जा रही लोगों की जान

Wed, 20 Sep 2023 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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लग्जरी कारों, बसों की हाईबीम लाइट से आए दिन हो रहे हादसे
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बाइक चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कारों और अन्य लग्जरी वाहनों की हाईबीम व लेजर लाइट छोटे वाहनों के लिए हादसों का कारण बन रहीं हैं। तमाम लोग अपने वाहन में फॉग जैसी अतिरिक्त लाइट या खास किस्म का बल्ब लगाते हैं। इसकी तेज रोशनी सामने से आ रही कार, बाइक, ऑटो, ट्रैक्टर और साइकिल वालों की आंख पर पड़ते ही चालक की आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे वे हादसों के शिकार हो जाते हैं। जानकार बताते हैं कि रात के वक्त बाइक चलाने वालों का 60 फीसदी दुर्घटना ऐसी लाइट की वजह से हो रही है। ऐसी लाइट परिवहन नियमों के खिलाफ है। फिर भी वाहन मालिक मनमानी करते हैं।
एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी के अनुसार, तीन वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा हादसे सामने की ओर से आने वाली लाइट की वजह से हुए हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी पंकज सिंह का कहना है कि मोटर वाहन एक्ट के तहत कंपनी से हेड लाइट लगी होती है, लेकिन वाहन मालिक बाद में उसकी सेफ्टी क्लिप हटाकर अपने तरह से लाइट और बल्ब लगवाते हैं। युवा वर्ग तड़क-भड़क रोशनी वाले ऐसे चाइना बल्बों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसकी रोशनी पड़ने पर कुछ पल के लिए अंधेरा छा जाता है।
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टूटे शीशे वाली कार न चलाएं

टूट शीशे के साथ कार को नहीं चलाना चाहिए। दिन के मुकाबले रात के समय टूटे शीशे के साथ कार चलाना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। शीशे पर खरोंच आने के बाद जैसे ही सामने से लाइट पड़ती है तो रोशनी फैल जाती है। साथ ही, टूटे शीशे के कारण ज्यादा रोशनी आंखों पर पड़ती है जिससे आंखों पर जोर पड़ता है।

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हाईबीम सामने वाले के लिए खतरनाक
हाईबीम यानी ऊपर की लाइट सामने वाले छोटे वाहन चालकों को काफी परेशान करती है। इसलिए जब हाईवे या एक्सप्रेस वे पर रात में सफर कर रहे हों, तभी कार में हाई बीम लाइट का प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि हाईवे और एक्सप्रेस वे पर सामने से आने वाला वाहन डिवाइडर के दूसरी ओर चल रहे होते हैं। ऐसे में किसी दूसरे को ड्राइविंग के दौरान परेशानी नहीं होती। जब आप सिंगल रोड या भीड़भाड़ वाली जगह पर ड्राइविंग कर रहे हों तो लो बीम प्रयोग करना चाहिए जिससे सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों पर तेज रोशनी का असर नहीं होता और उसे संभलने का पूरा मौका मिलता है।
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केस एक
गोरखपुर के खोराबार थानाक्षेत्र निवासी इंजीनियरिंग छात्र अनिकेत बाइक लेकर लखनऊ से घर जा रहा था। बाइक पर पीछे उसका साथी राहुल भी बैठा हुआ था। पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के सबदेइया कला गांव के पास उसकी बाइक अचानक डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में दोनों घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां अनिकेत की मौत हो गई। घायल राहुल ने बताया कि सामने से एक लग्जरी कार आ रही थी। उसके बोनट पर अलग से चार लेजर लाइटें लगीं थीं। उसकी रोशनी के कारण आंख चौंधियाने की वजह से बाइक अनियंत्रित होकर टकरा गई।
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केस दो
शहर के कोतवाली क्षेत्र के गांधीनगर निवासी अंकित अग्रवाल 29 जनवरी को अपनी पुरानी कार लेकर लखनऊ जा रहे थे। हर्रैया थानाक्षेत्र के संसारीपुर के पास सामने से एक लग्जरी कार आ रही थी। उसकी कार में लेजर लाइट लगी हुई थी। अंकित के अनुसार, उनकी आंख पर तेज लाइट लगी जिससे आंखों के सामने अंधेरा छा गया। उसी समय बाएं से एक पिकअप आ गई। गाड़ी अनियंत्रित होकर पिकअप में टकरा गई। गंभीर चोटें लगीं, लेकिन गनीमत रही कि उनकी जान बच गई।
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केस तीन
नगर थानाक्षेत्र के निवासी अरुण सिंह 11 जुलाई को बस्ती से बाइक लेकर घर जा रहे थे। फुटहिया चौराहे से कलवारी रोड पर महरीपुर गांव से आगे जाने पर सामने से एक कार आई। उसकी लाइट पड़ने से आंख चौंधिया गईं और बाइक उसी कार से जा टकराई। पुलिस ने घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां से लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। 13 दिन इलाज के बाद वह किसी तरह मौत के मुंह से बाहर निकला। पूछने पर बताया कि सामने की लाइट पड़ने की वजह से हादसा हुआ था।
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