नवंबर 2022 से पुलिस लाइंस के कमरे में चल रहा एंटी करप्शन थाना
घूस लेते पकड़े गए आरोपी को पुलिस के थाने में होती है एफआईआर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मंडल मुख्यालय पर एंटी करप्शन थाना खुलने के बावजूद कामकाज शुरू नहीं हो पाया है। थाने के लिए जरूरी हवालात और मालखाना न होने से दिक्कतें आ रही हैं। प्रकरण सामने आने के बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम पुलिस थाने का चक्कर काटती है। विडंबना यह कि पुलिस थाने में केस दर्ज होने के बाद उसकी तफ्तीश एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक को वापस कर दी जाती है। संगठन के प्रभारी निरीक्षक यूपी यादव ने बताया कि इसके लिए मुख्यालय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टालरेंस की नीति के तहत मंडल मुख्यालय पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) के मंडल मुख्यालय पर स्थापित इकाइयों को नवंबर 2022 में थाने के रूप में अधिसूचित कर दिया गया था। मगर बुनियादी संसाधनों के अभाव में अब तक अस्तित्व में नहीं आ सका। सबसे पहली जरूरत हवालात और मालखाने की है।
घूस लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारी या अधिकारी को एंटी करप्शन टीम गिरफ्तार करके कोतवाली ले जाती है। वहां टीम के ट्रैप प्रभारी तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराते हैं। बरामद रुपये या अन्य माल मुकदमाती पुलिस अपने मालखाने में रखवाती है। आरोपी को पुलिस के हवालात में रखा जाता है। अगले दिन उसे पुलिस अभिरक्षा में गोरखपुर एंटी करप्शन न्यायालय में पेश किया जाता है। वहां एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक की तरफ से रिमांड ली जाती है।
इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जाता है। वह केस पुलिस से एंटी करप्शन संगठन के यूनिट को विवेचना के लिए वापस कर दिया जाता है। जानकार बताते हैं कि न्यायालय भी अगर मंडल स्तर पर स्थापित कर दिया जाए तो कार्रवाई में तेजी आएगी।