बस्ती। कला में कौशल एवं रचनात्मकता दोनों का बराबर महत्व है। इसके माध्यम से जीवन के सभी अनुभवों की अभिव्यक्ति सहज रूप में की जा सकती है। कला आम जीवन से जुड़कर नए आयाम बनाती है।
यह कहना है राज्य ललित कला अकादमी के समन्वयक डॉ. भारत भूषण का। वह सरस्वती बालिका विद्या मंदिर रामबाग में आयोजित 20 दिवसीय ग्रीष्म कालीन चित्रकला कार्यशाला व प्रदर्शनी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य अतिथि डॉ. भारत भूषण, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुदीप्ता भूषण, डीआईओएस दलसिंगार यादव व डॉ. रमा शर्मा ने किया। राशि एवं सलोनी ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की।
डॉ. सुदीप्ता भूषण ने कहा कि प्रशिक्षुओं का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह बालक-बालिकाओं के लक्ष्य प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा। डीआईओएस डॉ. डीएस यादव ने चित्रकला कार्यशाला की प्रशंसा की। कहा कि इस तरह की कलात्मक गतिविधियों से ही नई पीढ़ी को ऊर्जा और सही दिशा मिलेगी। कार्यक्रम संयोजिका डॉ. रमा शर्मा ने कहा कि चित्रकला कार्यशाला के माध्यम से राज्य ललित कला अकादमी का उद्देश्य कलात्मक अभिरुचियों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना रहा है। चित्रकला कार्यशाला में कुल 22 प्रशिक्षुओं ने प्रतिभाग कर कला की बारीकियों को सीखने का प्रयास किया।
नेत्र चिकित्सक डॉ. मनोज शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। डॉ. रिचा ओझा ने प्रथम पुरस्कार सुमित भट्ट, द्वितीय हर्षिता एवं तृतीय पुरस्कार पलक सोनी को दिया।इसके अतिरिक्त श्रेयशी, प्रियांशी एवं कृति को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। संचालन मयंक श्रीवास्तव ने किया।अंत में कार्यक्रम संयोजिका डॉ. रमा शर्मा ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके पर राज्य ललित कला अकादमी के सदस्य डॉ. नवीन श्रीवास्तव, प्रशिक्षक अरविंद पांडेय, रजनी चौधरी, सीबी सिंह, लता सिंह, सरिता शुक्ला, यश शर्मा, कल्पना अग्रहरि, प्रदीप पांडेय, सरिता पांडेय, हरेन्द्र नाथ तिवारी आदि मौजूद रहे।