बस्ती। जिस प्रकार मुस्लिम समाज में दीनी रहनुमाई के लिए आलिम, हाफिज की जरूरत है, ठीक इसी तरह से देश, समाज और इंसानियत की सेवा के लिए डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आईएएस एवं पीसीएस की भी आवश्यकता है। जो उच्च शिक्षा और कड़ी मेहनत के बगैर संभव नहीं है। समाज को सही दिशा देने के लिए शिक्षा जरूरी है।
यह कहना है मौलाना जहीर अनवार कासमी का। वह मंगलवार को सल्टौआ गोपालपुर के ग्राम पंचायत पोखर भिटवा में जमीयत-ए-उल्मा के नेतृत्व में शिक्षा जागरूकता के अन्तर्गत जनसभा (जलसा) को संबोधित कर रहे थे। शैक्षणिक संस्था मजाहिर उलूम सहारनपुर के इस्लामिक स्कालर मौलाना मो. अकरम कासमी ने शिक्षा व अशिक्षा की तुलना करते हुए कहा कि शिक्षा एक ऐसा पवित्र दीप है जिसके जरिए समाज में शांति, एकता और मानवता की ज्योति फैलती है। जबकि अशिक्षा से समाज में अशांति, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आपसी भाईचारे में मतभेद पैदा होते हैं। मौलाना महमूद अहमद कासमी ने कहा कि मानवता के आधार पर सभी इंसान आपस में बराबर हैं। भाई भाई हैं। किसी गोरे को किसी काले पर, किसी अमीर को किसी गरीब पर, किसी छोटे को किसी बड़े पर कोई प्रमुखता नहीं है। उमीअत उलेमा रुधौली के अध्यक्ष मुफ्ती सईद अहमद मजाहिरी ने दहेज प्रथा पर अपनी बात रखी। कहा कि दहेज की कुरीति प्रथा ने पूरे समाज को अपनी जंजीर में जकड़ लिया है। जिससे बाहर निकलने की हर किसी को जरुरत है, जो बिना शिक्षा के संभव नहीं हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीयत उलेमा जिला बस्ती के अध्यक्ष मौलाना जहीर अनवार कासमी ने की व संचालन जनरल सेक्रेटरी मौलाना क्यामुद्दीन कासमी ने किया।