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डायलिसिस के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार

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डायलिसिस के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार
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जिला अस्पताल में डायलिसिस मशीन का अभाव, कैली अस्पताल में पीपीपी मॉडल से हो रहा डायलिसिस
तत्काल सेवा के लिए मरीजों को जाना पड़ता है गोरखपुर या लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा नहीं होने से ओपेक कैली अस्पताल में डायलिसिस के लिए मरीजों को पंद्रह दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में तत्काल डायलिसिस के लिए मरीजों को गोरखपुर या लखनऊ जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल सहित यहां तीन सरकारी अस्पताल हैं। यहां तकरीबन डायलिसिस के पचास मरीज आते हैं। इनमेें इमरजेंसी मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध कैली अस्पताल में डायलिसिस मशीन तकनीशियन नहीं होने के कारण तीन साल बंद है। इससे डायलिसिस का संचालन पीपीपी मॉडल पर हेरिटेज हॉस्पिटल कर रहा है। ओपेक में डायलिसिस के लिए 10 बेड की शैया है। यहां प्रतिदिन करीब 20 से 30 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। इससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं पीपीपी मॉडल पर संचालित हिमो डायलिसिस सेवा का लाभ मरीजों को तत्काल नहीं मिल सकता। इसलिए उन्हें बाहर जाने को विवश होना पड़ता है। उधर, जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है।
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प्रभारी सीएमओ बोले
प्रभारी सीएमओ डॉ. जय सिंह ने कहा कि ओपेक चिकित्सालय कैली में संचालित मशीन ही अपने जिले में है। ऐसे में किडनी के मरीजों के डायलिसिस के लिए वहां रेफर कर दिया जाता है।
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बोले प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि पीपीपी मॉडल से संचालित डायलिसिस सेवा में इमरजेंसी सेवा नहीं है। कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में डायलिसिस मशीन तो है, मगर यहां तकनीशियन न होने के कारण डायलिसिस बंद है। तीन साल से अस्पताल चलाया जा रहा है, मगर तकनीशियन नहीं मिल सके हैं। मशीन को सुरक्षित रख दिया गया है।
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