मेडिकल कॉलेज : 30 साल बाद भी जलनिकासी की नहीं बन पाई व्यवस्था, मुख्य नाले पर अतिक्रमण
चिकित्सक और स्टॉफ के आवासीय क्षेत्र में अनाधिकृत लोगों का आना-जाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती: मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली का परिसर असुरक्षित है। यहां पुलिस चौकी तक नहीं है। अस्पताल का चहारदीवारी तोड़कर राह बना लिया गया है। डॉक्टर और स्टॉफ के आवासीय क्षेत्र में अनाधिकृत लोगों का आना- जाना लगा रहता है। आवासीय भवनों की हालत भी दयनीय हैं। जलनिकासी की व्यवस्था 30 साल बाद भी दुरुस्त नहीं हो पाई है। बारिश के दिनों में अस्पताल परिसर जलमग्न रहता है। आवासीय क्षेत्र में झाड़-झंखाड़ उगे हैं। यहां भय के साए में लोगों को रहना पड़ता है।
कोलकाता में महिला रेजीडेंट डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत के बाद यहां भी सुरक्षा की मांग उठने लगी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज का अध्ययन केंद्र शहर से 10 किमी दूर रामपुर में है। जबकि अस्पताल यहां से पांच किमी दूर कैली में है। ऐसे में डॉक्टरों को अध्ययन केंद्र से अस्पताल तक आने-जाने में असुविधा होती है। अस्पताल की स्थापना मेडिकल कॉलेज के पहले की है। 30 साल पहले स्थापित ओपेक चिकित्सालय कैली के नाम से स्थापित इस अस्पताल के अधिकतर आवासीय भवन मरम्मत योग्य हो चुके हैं।
डॉक्टर और स्टॉफ के आवास की दीवारों से कई जगहों पर प्लास्टर उजड़ रहे हैं। शौचालयों के टैंक ओवरफ्लो हैं। घरों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है। आवासीय भवन के आसपास गंदा पानी पसरा रहता है। सफाई न होने से चौतरफा झाड़- झंखाड़ उग आए हैं। यहां रहने वाले डॉक्टर, स्टॉफ और उनके परिजन भय की वजह से घरों में ही रहते हैं। खुले में घूमने पर जीव-जंतुओं के अलावा अन्य तरह का खतरा है। अस्पताल की चहारदीवारी तोड़कर राह बना ली गई है। आसपास के ग्रामीण एवं अन्य लोग हर समय आवासीय क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।
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आवासीय भवन में घुस आया चोर
मंगलवार को ओपेक चिकित्सालय कैली के आवासीय भवन में एक चोर घुस आया। वह एक आवास के अंदर नल की टोटी खोल रहा था। इसी बीच एक महिला ने देख लिया। शोर मचाने पर घरों में से निकले लोग उसे पकड़ लिए। करीब एक घंटे तक भीड़ एकत्र रही। बाद में लोग पुलिस को बुलाकर उसे सौंप दिया। यह तो बानगी मात्र है। इस तरह की घटनाएं यहां आए दिन होती रहती हैं।
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चहारदीवारी भी नहीं बनने देते हैं मनबढ़
अस्पताल प्रशासन परिसर को सुरक्षित करने के लिए चहारदीवारी की मरम्मत कराने की पहल कई बार की। मगर, आसपास के मनबढ़ किस्म के लोग इसे बनने नहीं देते हैं। इससे परिसर में बाहरी तत्वों की आवाजाही बनी हुई है। कभी-कभी तो परिसर में रहने वाली महिलाओं, युवतियों के घूमने-फिरने पर अराजक तत्व उनके करीब पहुंचकर फब्तियां भी कसते हैं। इसके बाद चहारदीवारी के रास्ते परिसर से बाहर हो लेते हैं।
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नहीं बन सकी जलनिकासी की व्यवस्था
2013-14 में अस्पताल परिसर की जलनिकासी व्यवस्था के लिए नाला निर्माण की स्वीकृति मिली। कैली-सोनूपार मार्ग के किनारे अस्पताल गेट से सोनूपार तक नाला निर्माण कराया गया। मगर, यह परिसर की नालियों से कनेक्ट होने से पहले विवाद में फंस गया। तत्कालीन जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते नाला निर्माण अनुदान घोषित कर दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने नाला पाटकर अतिक्रमण कर लिया। बारिश के दौरान पूरा परिसर जलमग्न रहता है। आवासीय क्षेत्र में भी लोगों को पानी में घुसकर आना-जाना पड़ता है। अस्पताल में एक से दूसरे भवन में जाने के लिए मरीज और तीमारदारों को इसी तरह की दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है।
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सुरक्षा में महज 35 गार्डों की ड्यूटी
मेडिकल कॉलेज के अध्ययन केंद्र से लेकर अस्पताल तक की सुरक्षा में केवल 35 गार्ड का पद स्वीकृत है। जबकि आवश्यकता 75 से 100 सिक्योरिटी गार्डों की है। इतनी गार्डों की तैनाती होने के बाद ही दोनों जगहों की 24 घंटे सुरक्षा संभव है। बमुश्किल 20 गार्ड ही अस्पताल परिसर में तैनात किए गए हैं। 8 घंटे के चक्रानुक्रम में तीन गार्ड भी मिल रहे हैं। ज्यादातर गार्डों की ड्यूटी दिन में भीड़भाड़ के समय ही लगाई जा रही है। रात में परिसर असुरक्षित हो जाता है।
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कोट
क्षतिग्रस्त चहारदीवारी की मरम्मत शीघ्र कराई जाएगी। परिसर में अनाधिकृत लोगों का प्रवेश वर्जित रखने के लिए पुलिस की मदद ली जाएगी। जहां तक जलनिकासी व्यवस्था बहाल करने की है तो इसमें प्रशासनिक मदद की जरूरत है। तभी मुख्य नाला अतिक्रमण मुक्त होगा। सिक्योरिटी गार्ड बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
-डॉ. समीर श्रीवास्तव, सीएमएस