व्यापारी के पुत्र के अपहरण मामले में नामजद है पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की व्यापारी के बेटे के अपहरण मामले में न्यायालय का शिकंजा कसता जा रहा है। फरार आरोपी अमरमणि की संपत्तियों की कुर्की करने में पुलिस के ढुलमुल रवैये से नाराज न्यायालय ने फिर सख्त टिप्पणी की।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम/विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) प्रमोद कुमार गिरि की अदालत की तरफ से कहा गया है कि स्थानीय पुलिस अभियुक्त अमरमणि त्रिपाठी के विरूद्ध प्रभावशाली कार्रवाई करने में अक्षम रही। जबकि न्यायालय समय-समय पर आदेश देता रहा। लिखा है कि अभियुक्त अमरमणि त्रिपाठी बहुत ही दुर्दांत व प्रभावशाली व्यक्ति है। उसका लंबा आपराधिक इतिहास है। पू
बता दें कि 22 वर्ष पुराने केस में गिरफ्तारी कर पाने में अब तक नाकाम रही पुलिस नोटिस तामील कराने से लेकर कुर्की करने के आदेश के अनुपालन में भी मोहलत पर मोहलत लेती रही। बृहस्पतिवार को केस की सुनवाई के दौरान कोतवाल चंदन कुमार की तरफ से एक बार फिर मोहलत की अपील की गई।
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पुलिस की तरफ से दी गई रिपोर्ट
पुलिस की तरफ से न्यायालय को रिपोर्ट प्रस्तुत कर कहा गया कि अपहरण, साजिश, गैंगस्टर आदि धाराओं में वांछित अमरमणि त्रिपाठी निवासी 19 ए हुमायूंपुर दक्षिण थाना कोतवाली जनपद गोरखपुर की कुर्की के क्रम गठित टीम को चल अचल संपत्ति का विवरण प्राप्त हो गया है। पूरे भारत में चल अचल संपत्ति के संबंध में पुलिस अधीक्षक के माध्यम से पत्राचार किया गया है, जो अभी प्राप्त नहीं है। ज्ञात संपत्ति के संबंध में विक्रांत खंड गोमती नगर योजना में 450 वर्ग मीटर की कुल एक करोड़, 18 लाख 80 हजार रुपये मूल्य की भूमि का पता चला है। इसकी कुर्की के लिए पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट लखनऊ व जिला मजिस्ट्रेट लखनऊ को एक मजिस्ट्रेट, एक रिसिवर एवं स्थानीय पुलिस बल के लिए पत्राचार किया गया था। पुलिस उपायुक्त मुख्यालय लखनऊ से अवगत कराया गया है कि उक्त कार्रवाई के लिए न्यायालय से अग्रिम तिथि प्राप्त कर पत्राचार करें। ऐसे में कुछ और समय प्रदान की जाए।
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यह है मामला
छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। इस मामले में कोतवाली में अपहरण का केस दर्ज कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में अमरमणि समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया है। आरोप है कि लखनऊ के जिस मकान से अपहृत बालक मिला था, वह तत्कालीन मंत्री अमरमणि का था। अमरमणि के खिलाफ 24 अक्तूबर 2011 से गैर जमानती वारंट जारी था। तीन नवंबर 2023 को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने बस्ती कोतवाली पुलिस को सीआरपीसी-82 की कार्रवाई करने का आदेश दिया था। 16 नवंबर की सुनवाई में पुलिस ने सीआरपीसी-82 की कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराया, लेकिन न्यायाधीश ने खारिज करते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली के विरुद्ध कार्य में शिथिलता व लापरवाही का प्रकीर्णवाद दर्ज कर दो दिसंबर को तलब किया था।