बस्ती। गोवंश के संरक्षण के सभी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। इसका संतोषजनक फीडबैक उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच रहा है। सोमवार को आयुक्त सभागार में समीक्षा के दौरान गोवंश को पकड़ने से लेकर आश्रय स्थलों तक सिलसिलेवार पोल खुली। अव्यवस्था की रिपोर्ट सुनते ही कमिश्नर अखिलेश सिंह नाराज हो गए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।
समीक्षा में पाया गया कि 6- 6 माह से गो आश्रय स्थलों पर तैनात केयरटेकरों को मानदेय नहीं मिला है, जिन गो पालकों की सुपुर्दगी में छुट्टा पशुओं को दिया गया है, उनके भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दी जाने वाली धनराशि कई महीनों से नहीं दी गई है। गो आश्रय स्थलों पर रजिस्टर दुरुस्त न होने का भी मामला सामने आया। अभियान के तहत पशुओं की पकड़ने की गति भी बेहद धीमी पाई गई।
कमिश्नर ने कहा कि यह शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता का कार्यक्रम है। इसमें लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। उन्होंने बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर जिले के सीडीओ को निर्देशित किए कि प्रत्येक माह इसकी समीक्षा कर व्यवस्था में अनिवार्य रूप से सुधार करें। पशु चिकित्सा अधिकारी सप्ताह में दो बार आश्रय स्थलों का निरीक्षण करें। वहां उपलब्ध रजिस्टर पर अपनी टिप्पणी अंकित करें। प्राकृतिक या दुर्घटना में मृतक पशुओं का विवरण भी रजिस्टर में दर्ज किया जाए। यह विवरण पोर्टल पर भी दर्ज किया जाए। इससे संबंधित एक रजिस्टर ग्राम पंचायत सचिव कार्यालय में भी रखा जाए।
यह थी छुट्टा पशुओं को पकड़ने की प्रगति
बस्ती में 2500 लक्ष्य के सापेक्ष 888, संत कबीर नगर में 1500 के सापेक्ष 202 तथा सिद्धार्थनगर में 2000 के सापेक्ष 698 पशु पकड़कर संरक्षित किए गए हैं। इस पर कमिश्नर ने कहा कि 15 दिसंबर को शासन के नोडल अधिकारी द्वारा अभियान की समीक्षा की जाएगी। इससे पहले अवशेष पशुओं को पकड़कर लक्ष्य पूरा किया जाए। सभी गोआश्रय स्थलों पर रात में केयरटेकर के रुकने की भी व्यवस्था बनाई जाए। रात्रि निवास करने वाले केयरटेकरों को 10 हजार मानदेय दिया जाएगा।