परशुरामपुर। डुहवा पांडेय में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास भुवनेश ने कृष्ण रूक्मिणी विवाह की कथा सुनाई। पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रूक्मिणी जब विवाह के योग्य हुई तो उन्होंने अपने बेटे रूक्मी से वर तलाशने के लिए कहा। रूक्मी ने शिशुपाल से रूक्मिणी की शादी तय कर दी। जब रूक्मिणी को पता चला तो,वह व्याकुल होने लगी ,क्योंकि रूक्मिणी ने द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण को अपना स्वामी मान लिया था। रुक्मिणी का संदेश पाकर द्वारिकाधीश कृष्ण विवाह मंडप से रूक्मिणी का हरण करते हैं। शिशुपाल की सेना से कृष्ण का भीषण युद्ध होता है। शिशुपाल को परास्त कर कृष्ण रूक्मिणी को लेकर द्वारिकापुरी आते है,जहां धूम-धाम से कृष्ण और रूक्मिणी का विवाह होता है। विवाहोत्सव में सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया।