कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने किया स्नान, दान
बस्ती। कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू, कुआनों, मनवर सहित जिलेभर की विभिन्न नदियों में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। इस दौरान परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने अन्न व गोदान भी किया। विभिन्न स्थलों पर आयोजित मेले में लोगों ने जरूरत के सामानों की खरीदारी की तो बच्चों ने मेले में मनोरंजन किया। जिले से काफी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या के नए घाट पर सरयू स्नान करने पहुंचे। इसके अलावा घरों में भी स्नान, दान व पूजन का क्रम देर तक चलता रहा।
कुदरहा प्रतिनिधि के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को सरयू नदी के नौरहनी घाट पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। पवित्र स्नान के बाद लोगों ने अन्न और गोदान कर पुण्य अर्जित किया। यहां आयोजित मेले में जमकर खरीददारी की। नदी पर भोर में तीन बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो शाम तक चलता रहा। जगह-जगह महिलाओं ने मंगल गीत के साथ सरयू माता को कड़ाही चढ़ाई और पूड़ी-हलवा का प्रसाद वितरित किया। तट पर लगे मेले में महिलाओं ने जहां शृंगार प्रसाधन की खरीदारी की। वहीं, तमाम श्रद्धालुओं ने खेती-बाड़ी से जुड़े यंत्र खरीदे।
बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार पूर्णमासी के दिन हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। यहां श्रद्धालु गो पूजन, दान-पुण्य व कथा सुनकर पुण्य के सहभागी बने। पवित्र सरयू के नौरहनी, मयंदी घाट पर सुबह से ही स्नानार्थियों का तांता लग गया। क्षेत्र के बनकटी, महादेवा, लालगंज, देईसाड़, पक्का बाजार, बरहुआ मुंडेरवा, लालगंज आदि क्षेत्रों से यहां जुटे।
कलवारी प्रतिनिधि के अनुसार पवित्र सरयू नदी के माझाखुर्द घाट पर क्षेत्र के गांवों से हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगायी। क्षेत्र के खखोड़ा, दौलतचक, फेटवा, गौसपुर, कलवारी, अगौना, वैष्णोपुर, मालपुर, भोयर, बेनीपुर, माझाकला, गोड़ियाजोत, धोबहट, माझाखुर्द, रसोइया, लक्षिमनपुर, गुलहरिया, भैंसहटी, चकदहा, तुरकौलिया के हजारो की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने नदी में डुबकी लगाकर दान दिया। महिला श्रद्धालुओं ने मां सरयू को पूड़ी व लप्सी चढ़ाने के साथ गोदान भी किया।
दुबौलिया प्रतिनिधि के अनुसार ब्लाक क्षेत्र के शेरवा घाट स्थिति सरयू नदी के पावन तट पर मेले का आयोजन हुआ। सुबह से ही पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़ ने सरयू में डुबकी लगाकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। विक्रमजोत दस किमी लंबे क्षेत्र में स्थित आधा दर्जन सरयू घाट बांदीपुर, सरवरपुर, काशीपुर, गौरिया नैन और 10 नंबर ठोकर पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर दान पुण्य किया।
टिनिच प्रतिनिधि के अनुसार बाराह क्षेत्र के कुआनों नदी घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार पृथ्वी को बचाने के लिए इसी स्थान पर भगवान विष्णु अपने बारहवां अवतार शूकर के रूप में अवतरित हुए थे और थकान दूर करने के लिए यहीं स्थिति कुंड में विश्राम किया था। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से चर्म रोग ठीक होता है।
भगवान कार्तिकेय से जुड़ी है परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देव पूजन में प्रथम स्थान के लिए कार्तिकेय की गणेश से प्रतियोगिता हुई जिसमें वे हार गये। क्रोधित होकर कार्तिकेय तप करने चले गये उस दौरान उन्होंने श्राप दिया था कि यदि कोई पुरुष या महिला उनके पास जाएगी तो उसे नरक भोगना पड़ेगा। भगवान शिव व माता पार्वती के मनाने पर उन्होंने कहा था कि वर्ष में एक दिन सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा को ही उनसे मिल सकते है। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर उन्हें प्रसन्न करने के लिए लोग स्नान, दान इत्यादि करते हैं।