निर्माण इकाई के पास इंजीनियर तक नहीं, लेखा-जोखा रखने वाला भी कोई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर में विकास की गाड़ी रुक गई है। नगर पालिका के निर्माण इकाई में दो साल से इंजीनियर नहीं हैं। अब अधिशासी अधिकारी के लिए तरसना पड़ रहा हैं। कर्ज में डूबी पालिका विकास की गाड़ी को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। आधा दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। धनाभाव में सभासदों के विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों का मोटा पुलिंदा धूल फांक रहा हैं। संविदा एवं स्थायी कर्मियों के वेतन तक के लाले पड़ गए हैं।
शहरवासियों को निकाय सरकार चुने सात महीने हो गए। अब तक नगर पालिका परिषद विकास की पटरी पर नहीं लौट पाई है। एक-एक कर सभी परियोजनाएं ठप होती गईं। सड़क, पार्क, इंटरलॉकिंग, नाला, नाली आदि निर्माण कार्य बंद हो गए हैं। बजट के अभाव में यहां की निर्माण इकाई भी टूटने के कगार पर है। दो साल से पालिका के पास एक भी इंजीनियर नहीं हैं। 15 दिन पहले यहां तैनात अधिशासी अधिकारी गैर जनपद स्थानांतरित हो गए। तभी से ईओ का पद रिक्त चल रहा हैं। इस पद का दायित्व सफाई निरीक्षक के जिम्मे हैं।
पालिका का हाथ खाली होने से अब यहां ठेकेदारों की चहल-पहल न के बराबर हो गई है। दो साल पहले तक पालिका कार्यालय का निर्माण अनुभाग ठेकेदार, कर्मचारी और इंजीनियरों से गुलजार हुआ करता था। पालिका के लेखा संबंधी कार्य एक बाबू के हवाले कर दिया गया हैं।
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21 करोड़ के कर्ज में डूबी पालिका
नगर पालिका पिछले आठ सालों से कर्ज में डूबी हुई है। 15वां राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले बजट से प्रतिमाह करीब 30 लाख रुपये किस्त के तौर कटौती हो रही है। प्रत्येक माह तीन से साढ़े तीन करोड़ रुपये शासन से इस मद में प्राप्त हो रहा है, मगर निर्माण कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं है। क्योंकि इसी मद में से ऋण के किस्त्की कटौती और कार्यरत कर्मचारियों का वेतन तथा पेंशनरों के देयकों का भुगतान सुनिश्चित होता है। ऐसे में यह बजट विकास के लिए उपयुक्त नहीं साबित हो पा रहा हैं।
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ठप पड़ीं महत्वपूर्ण परियोजनाएं
मालवीय मार्ग जर्जर हो चुका है, मगर डेढ़ किमी लंबी इस सड़क को बनवाने के लिए पालिका के पास धन नहीं है। ब्लॉक रोड और रेलवे स्टेशन मार्ग के निर्माण के लिए भी बजट का रोना है। अमहट घाट के पास पार्क का निर्माण ठप हो गया हैं। घनी आबादी के बीच खुले नालों को ढकने का कार्य नहीं शुरू हो पा रहा है। वेंडिंग जोन, पार्किंग जोन, टैक्सी स्टैंड निर्माण की परियोजना भी बाधित है।
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चुनाव के समय वादा हुआ था विकास का। जनता ने अपना काम कर दिया। अब जनप्रतिनिधियों का यह विषय है कि शहर का विकास कैसे हो। इसके लिए उन्हें ठोस प्रयास करना चाहिए। इसीलिए तो निकाय सरकार चुनी गई।
-ओंकार चौधरी, रंजीत चौराहा
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शहर की मुख्य सड़कें चलने लायक नहीं हैं। गलियों-मोहल्लों की स्थिति और खराब है। सफाई कार्य प्रभावित हो गया हैं। जनता जनप्रतिनिधियों की समस्या सुनने के लिए थोड़े चुनाव किया है।
-अवधेश मिश्र, रोडवेज
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कोट
नगर पालिका में रिक्त चल रहे सभी पदों की पूर्ति के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका हैं। ईओ और अभियंताओं की तैनाती जल्द होने की उम्मीद हैं। बजट की भी मांग विभिन्न मदों में की गई है।
नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका