बीमार स्कूली वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एआरटीओ ने आदेश जारी किया। इसके लिए पुलिस से सहयोग मांगा था। लेकिन दो महीने बाद भी ये बीमार वाहन बच्चों को असुरक्षित यात्रा करा रहे है। इन पर न तो पुलिस ने अंकुश लगाया और न ही संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों ने। इनकी संख्या में कमी होने के बजाए बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
बिना फिटनेस के चल रहे स्कूली वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के साथ एआरटीओ ने एसपी को पत्र भेजकर सहयोग मांगा था। पत्र में थाना क्षेत्र में पुलिस को बिना फिटनेस के चल रहे स्कूली वाहनों पर कार्रवाई करनी थी। जबकि पूरे कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर परिवहन विभाग मुख्यालय भेजा जानी थी। इस मामले में दोनों ही विभागों ने सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए। जिले में कुल 1065 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। दो महीने पहले हुई पड़ताल में 315 वाहनों ने फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं बनवाया था। परिवहन विभाग ने काली सूची में डालकर नोटिस जारी किया था।
पंजीकरण रद्द कराने की दी थी चेतावनी
नोटिस में सख्त हिदायत दी गई थी कि अगर इनका फिटनेस नहीं बनवाया गया तो उनका रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया जाएगा। सभी को लापरवाही बरतने पर पंजीयन निरस्त करने की चेतावनी दी गई थी। यही नहीं अगर यह वाहन सड़क पर बच्चों की ढुलाई करते मिले तो विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। इस आदेश के दो माह बीतने के बाद भी 317 स्कूली वाहन संचालक नींद से नहीं जाग रहे हैं। वहीं, परिवार विभाग मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट को लेकर परेशान है। परिवहन विभाग के आयुक्त ने एसपी और एआरटीओ को पत्र भेज कर अनफिट वाहनों की सूची उपलब्ध कराया है। ताकि संबंधित थाना क्षेत्रों में संचालित सभी स्कूली वाहनों की विधिवत जांच हो सके और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
थानावार भेजी जा चुकी है सूची
एआरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने बताया कि परिवहन आयुक्त के निर्देशा पर एसपी को सूची उपलब्ध करवा दिया गया है। ताकि अनफिट स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जा सके। एआरटीओ ने बताया कि दो माह में कुछ वाहनों का फिटनेस तो बन गया, लेकिन कई के फिटनेस की समय-सीमा समाप्त हो गई है।