बस्ती। देश का युवा जुए के चलते बर्बाद न हो इसके लिए सख्त कानून है, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है। प्रशासन को चकमा देने के लिए जुआरी हाईटेक तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ताश की पत्तियों की जगह अब ऑनलाइन जुआ खेलने वालों की तादाद बढ़ गई है। यही नहीं, ऑनलाइन लॉटरी के प्रति भी युवाओं का रुझान काफी बढ़ गया है। मोबाइल फोन पर उपलब्ध तमाम गेमिंग एप के जरिए लोग रोज दांव लगा रहे हैं। शहर में कुछ लोग लोगों से पैसे लेकर नंबर लगाकर जीत-हार का खेल खेल रहे हैं। पिछले दिनों ऑनलाइन लॉटरी से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था लेकिन इस पर प्रभावी अंकुश लगाना पुलिस के वश के बाहर की चीज है।
शहर में भी सक्रिय है गिरोह
- इंटरनेट के जरिए निजी तौर पर भी तमाम गिरोह नंबर गेम में लोगों की कमाई बर्बाद करने में लगे हैं। शहर के रौता चौराहा, बैरिहवां, रंजीत चौराहा, पुरानी बस्ती, गांव गोड़िया, बभनगांवा सहित अन्य स्थानों को इस धंधे में शामिल लोगों ने अड्डा बना रखा है। इसके लिए कुछ लोगों की नियुक्ति भी की गई है। जो लोगों से उनके मनचाहे नंबर पर बोली लगवाते हैं। शाम के समय इसका रिजल्ट आउट किया जाता है।
केस एक-
लूट का किया नाटक
- सोनहा थानाक्षेत्र का एक युवक मोबाइल पर चलने वाला तीन पत्ती एप से जुआ खेलता था। उसमें वह घर के काम के लिए रखे साढ़े 39 हजार रुपये बिना किसी को बताए दांव पर लगा दिया और पूरी रकम हार गया। इस रकम की भरपाई के लिए वह घरेलू कार्य के लिए बैंक में रखी रकम निकालकर लाया और उसमें से 31 हजार रुपये झाड़ी में छिपाकर लूट होने का नाटक रच डाला। पुलिस ने छानबीन की और युवक को पकड़कर पूछताछ की तो उसने सारी कहानी बयां कर दी।
-
केस दो-
हार गया 89 हजार रुपये
- गांधीनगर का एक युवक फेसबुक पर एड देखकर मोबाइल फोन पर नंबर गेम वाला एप इंस्टाल कर लिया। उस एप के नियम-शर्तों के मुताबिक, उसने अपना बैंक एकाउंट लिंक कर दिया। कुछ दिन तक वह सौ-दो सौ रुपये दांव पर लगाता रहा। उसमें कभी एक हजार तो कभी पांच सौ रुपये जीतता रहा। उसके बाद उसने दो से तीन हजार रुपये लगाना शुरू कर दिया। एक महीने बाद अचानक उसके खाते में जमा 89 हजार रुपये कट गए। इसकी उसने पुलिस से शिकायत की। साइबर सेल ने जांच की तो पता चला कि वह सारी रकम हार चुका है।
-
निजी तौर पर खेलते हैं ऐसे गेम
- ऑनलाइन गेम निजी तौर पर लोग खेलते हैं। इसमें अक्सर कोई बाहर का व्यक्ति शामिल नहीं होता है। दूसरे प्रांत या दूसरे देशों में बैठे इसके संचालक एप को ऑपरेट करते हैं। ज्यादातर मामलों में जीतने-हारने के बारे में कोई पुलिस को शिकायत करने नहीं आता है। जहां तक शहर में चलने वाले गिरोह का सवाल है तो ऐसे कुछ लोग पिछले दिनों पकड़े गए थे। अगर उनकी गतिविधियां फिर चल रही हैं तो उन पर गोपनीय ढंग से कार्रवाई की जाएगी। -गोपाल कृष्ण चौधरी- एसपी