20 लाख रोजाना की जगह 17 लाख रुपये हुई आमदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। निजी बसों के बे-रोकटोक फर्राटा भरने और मौसम की बेरुखी से परिवहन निगम की आमदनी लगातार घटती जा रही है। मानक के अनुसार, पर्याप्त यात्री न मिलने के कारण कई बसें निरस्त करनी पड़ रही हैं। बसों के निरस्त होने से निगम की बसों पर भरोसा जताने वाले लखनऊ व दिल्ली के यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोकल रूटों पर भी बसों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
जून के तीसरे सप्ताह में डिपो की आय में औसतन करीब तीन लाख रुपये का रोजाना नुकसान हो रहा है। पहले जहां 20 लाख औसत आय रोजाना थी, वहीं अब 17 लाख रुपये हो चुकी है। इसका प्रमुख कारण डिपो के वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी बताई जा रही है। वहीं दिनभर तपती धूप एक बड़ी बाधा बनी हुई है। विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के अनुसार, पहले दिल्ली की दर्जन भर बसों समेत रोजाना करीब 55-60 बसें निकलती थीं, वहीं इन दिनों बमुश्किल से 30-35 बसें ही निकल पा रही हैं।
इधर, प्रचंड गर्मी से लोगों का आवागमन कम हो गया है। इससे कई लोकल रूट पर फेरे में कटौती करनी पड़ी। इसलिए समय से बसें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। लंबी दूरी पर जाने वाले यात्री घंटों बस का इंतजार करते दिखाई देते हैं। इस समय डुमरियागंज रूट पर बस की सुविधा बाधित हो गई है। इस रूट पर कभी बस उपलब्ध होती है तो यात्री नहीं उपलब्ध होते हैं और जब यात्री जुटते हैं तो बस नहीं मिल पाती है।
डुमरियागंज व इस रूट पर जाने वाले यात्री रामवृक्ष, राम प्रताप चौधरी, सुभाष व राम लखन सिंह आदि ने बताया कि वह लोग नियमित यात्रा करते हैं। करीब एक सप्ताह से बस न मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कभी बस ही नहीं रहती तो कभी यात्रियों के अभाव में बस नहीं रवाना हो पाती। लिहाजा टैक्सी के सहारे किस्तों में यात्रा पूरी करनी पड़ रही है।
वहीं लंबी दूरी के लिए बढ़नी व सोनौली से दो बसें बस्ती होकर लखनऊ व दिल्ली तक सेवा देती थीं। इसके अलावा बस्ती से नियमित दो बसें इसी रूट पर रवाना होती थीं। जबकि इस समय सिर्फ सोनौली व बढ़नी की बसें ही थोड़े बहुत यात्रियों को लेकर लंबे रूट पर निकल पा रही हैं। वहीं बस्ती की बसें यात्रियों के अभाव में प्रभावित हो रही हैं। जिसका नतीजा यह हो रहा है कि बस्ती डिपो रोजाना घाटे की तरफ बढ़ता जा रहा है।
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कोट
लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए सभी बसों को चाक-चौबंद रखा गया है। प्रचंड गर्मी के कारण यात्रियों की संख्या में गिरावट आई है। डिपो में पर्याप्त बसें उपलब्ध हैं। सुबह-शाम को जैसे-जैसे यात्री जुटते हैं, उसी अनुसार बसों को रवाना किया जा रहा है।
-आयुष भटनागर, एआरएम