बिना ढूंढे एसडीआरएफ की टीम वापस, लोगों में गुस्सा
हादसा स्थल से 200 मीटर दूरी पर नदी में चरवाहों ने देखा सोहन का शव
रविवार को नहाते समय पानी में डूब गए थे चार बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
दुबौलिया (बस्ती)। सरयू नदी क्षेत्र के मोजपुर घाट पर डूबे 14 वर्षीय किशोर सोहन का शव मंगलवार को हादसा स्थल से 200 मीटर दूरी पर पानी में उतराया मिला। दोपहर करीब 12 बजे चरवाहों ने उतराया शव देखकर ग्रामीणों को सूचित किया। इसके बाद स्थानीय गोताखोरों ने शव को नदी से निकाला। एक किशोरी अब तक लापता है। एसडीआरएफ गोरखपुर की टीम सोमवार शाम को ही वापस लौट गई। इससे लोगों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार, रविवार दाेपहर करीब दो बजे नौ बच्चे सरयू नदी में स्नान कर रहे थे। इस दौरान चार बच्चे नदी की धारा में लापता हो गए। बच्चों ने गुहार लगाने पर आसपास के लोगों ने पहुंचकर नदी से पांच बच्चों को बचा लिया, लेकिन पिपरी गांव निवासी बंशीधर गिरि की बेटी पार्वती (20) व शालिनी (17), बंशीधर के भाई अनिरुद्ध की पुत्री काजल (14) और रमवापुर निवासी सोहन पुत्र रामू (13) नदी की धारा में लापता हो गए।
स्थानीय गोताखोरों ने कुछ घंटे बाद पार्वती व काजल का शव ढूंढ लिया था, लेकिन सोहन व शालिनी का पता नहीं चला। दोनों की तलाश के लिए सोमवार सुबह 9:45 बजे एसडीआरएफ गोरखपुर से राज्य आपदा मोचन सब इंस्पेक्टर राम प्रकाश राय के नेतृत्व में 18 सदस्यीय टीम ने दो मोटर बोट से सरयू नदी में सर्च अभियान शुरू किया। शाम 4:30 बजे तक सफलता नहीं मिली। बाद में टीम लौट गई। मंगलवार सुबह से ही स्थानीय गोताखोरों की मदद से परिवार के लोग बच्चों को ढूंढने में जुट गए थे। दोपहर 12 बजे के आसपास सोहन का शव उतराया हुआ मिला। शालिनी का देर शाम तक पता नहीं चल सका था।
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कांपते हाथों से दफन की गईं दोनों चचेरी बहनें
स्थानीय गोताखोरों ने कुछ घंटे बाद पार्वती व काजल का शव ढूंढ लिया था। दोनों शवों का सोमवार को पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग शव लेकर देर शाम सरयू तट पर पहुंचे, जहां दोनों चचेरी बहनों पार्वती व काजल का शव कांपते हाथों से मिट्टी में दफन किया गया। इस दौरान परिवार के लोगों का हाल देखकर लोगों का कलेजा मुंह को आ गया।
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खाली हाथ लौटी एसडीआरएफ टीम
सोमवार की सुबह गोरखपुर से राज्य आपदा मोचन बल की 18 सदस्यीय टीम सब इंस्पेक्टर राम प्रकाश राय के नेतृत्व में पहुंची तो ग्रामीणों का काफी भरोसा बढ़ गया था। उन्हें विश्वास था कि ऐसे मौकों के लिए प्रशिक्षित पुलिस टीम लापता बच्चों को अवश्य ढूंढ निकालेगी। मगर, पूरे दिन मथने के बावजूद शाम तक टीम को सफलता नहीं मिली। इसके बाद अभियान बीच में छोड़कर टीम लौट गई।