लालगंज थाना क्षेत्र के कोप गांव के पास नदी के किनारे की घटना
संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज, बस्ती । लालगंज बाजार से सटे कोप गांव के पास कुआनो नदी के किनारे मंगलवार सुबह बबूल के पेड़ से लटका संतकबीरनगर जिले के रहने वाले बस चालक का शव मिला। उसके गले में रस्सी का फंदा लगा हुआ था। उसके बेटे ने मौके पर पहुंचकर शिनाख्त की। बताया जा रहा है कि युवक का गांव की एक महिला से संबंध का। इसकी जानकारी होने के बाद एक दिन पहले महिला के पति ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद उसकी पत्नी घर से गायब हो गई थी। माना जा रहा है कि वह खुद केस में फंस न जाए, इस घबराहट में उसने आत्महत्या कर लिया। मौके से नमकीन के पैकेट, शराब की शीशी आदि मिले हैं।
जानकारी के मुताबिक, लालगंज बाजार के कोप गांव के पास कुआनो नदी के किनारे सुबह करीब छह बजे जब आसपास के लोग पहुंचे तो बबूल के पेड़ पर शव लटका हुआ दिखाई दिया। लोगों ने इसकी सूचना लालगंज चौकी प्रभारी राम भवन प्रजापति को दी। सूचना मिलते ही लालगंज थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह मय फोर्स पहुंचकर मौके पर मिले आधार कार्ड ई-श्रम कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के माध्यम से पहचान संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के भीटी माफी गांव के 46 वर्षीय दिलीप शर्मा के रूप में की। जेब में मोबाइल फोन मिलने के बाद उसके जरिये परिवार के लोगों को सूचना दी गई। मृतक के बड़े पुत्र ओमकार उर्फ बादल और रिश्तेदार मौके पर पहुंचे। रिश्तेदार व पुत्र की मौजूदगी में लालगंज पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया। मौके पर मृतक का आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, ई-श्रम कार्ड, शराब व पानी की बोतल, खाली गिलास, चिप्स-नमकीन, प्लास्टिक का झोला व मृतक का चप्पल मिला।
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शर्ट पर लिखा था शायरी
महुली थाना क्षेत्र के भीटी माफी निवासी दिलीप शर्मा पेशे से चालक थे। इनके तीन पुत्र ओमकार उर्फ बादल , सुमित, व आनंद हैं। पुलिस के मुताबिक दिलीप ने फंदा लगाने से पहले जमीन और अपने शर्ट पर शायरी और मरने की वजह के बारे में लिखा था। हालांकि, वह ज्यादा पठनीय नहीं था, लेकिन इतना जरूर समझ में आया कि खुशी और गम में अपनी जान दे रहा हूं। एक महिला का नाम लिखते हुए लिखा है कि उसके गम में वह जान दे रहा है।
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रविवार को घर से झोला लेकर निकला था दिलीप
गांव के प्रधान के साथ पहुंचे दिलीप के बेटे ने बताया कि वह रविवार शाम को ही घर से पैदल निकल गए थे। घर से सिर्फ प्लास्टिक का झोला उनके हाथ में था। सोमवार को दिन भर-रात भर कहां रहे और कैसे लालगंज के पास पहुंच गए, यह किसी को जानकारी नहीं है।