- ट्रेजरी ऑफिसर बनकर फोन पर बात कर दिलाता था भरोसा, जानकारी हासिल कर खाता कर देता था खाली
- अंतरराज्यीय साइबर अपराधी के खिलाफ बस्ती के अलावा गोरखपुर, आजमगढ़, बदायूं जिले में भी दर्ज हैं नौ केस
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पेंशन अपडेट करने के नाम पर सेवानिवृत्त कर्मियों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले शातिर गिरोह के सरगना को साइबर क्राइम थाने की टीम ने बृहस्पतिवार को दबोच लिया। पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी राजू शाव नाम के अंतरराज्यीय साइबर अपराधी के खिलाफ बस्ती के अलावा गोरखपुर, आजमगढ़, बदायूं जिले में नौ केस दर्ज हैं। राजू के बैंक खातों को फ्रीज कर साइबर टीम और ब्योरा खंगाल रही है।
बस्ती रेंज के साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक विकास यादव ने बताया साइबर अपराधियों के इस गिरोह के लोग पश्चिम बंगाल में बैठकर कई वर्षों से पेंशनर्स को झांसे में लेकर ठगी कर रहे थे। उनके शिकार बने पुलिस पेंशन धारक इंद्रजीत यादव ने करीब 16 लाख रुपये, पुलिस पेंशनर विद्यासागर ने करीब 24 लाख व शैलेश पांडेय ने 2.40 लाख रुपये की ठगी करने की सूचना दी थी। केस दर्ज कर तफ्तीश की गई। तकनीकी संसाधनों का प्रयोग करते हुए जानकारी मिली कि झारखंड एवं पश्चिम बंगाल का गिरोह इसमें शामिल हैं।
मोबाइल फोन नंबर, बैंक खातों और अन्य माध्यमों से सरगना राजू शाव के लोकेशन की जानकारी हासिल की गई। इसके बाद उसे एसआई अवधेश वर्मा, महेंद्र यादव, राजेश यादव, मनोज राय, गौरव श्रीवास्तव आदि की टीम ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से अपराध में प्रयुक्त कई मोबाइल फोन, आधार कार्ड आदि बरामद किए गए हैं। एनसीसीआरपी पोर्टल व साइबर सेफ पोर्टल पर सर्च करने पर जानकारी हुई कि राजू शाव ने अन्य जनपदों के लोगों से भी ऑनलाइन रुपयों की ठगी की है। गिरोह के अन्य गुर्गों की भी तलाश की जा रही है।
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इस तरह करता था ठगी
राजू शाव ने बताया कि वह अन्य साथियों की मदद से सरकारी सेवानिवृत्त कर्मियों के डाटा को ओपन सोर्स से ऑनलाइन प्राप्त करता था। कर्मचारी को फोन कर खुद को ट्रेजरी ऑफिसर बताता था। सर्विस का विवरण बताकर पहले विश्वास में लेता था। इसके बाद पेंशन आदि अपडेट करने के नाम पर उनसे ओटीपी व उनके खातों की गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लेता था। इसके बाद उनके बैंक खातों में मौजूद जमा पूंजी दूसरे खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेता था।