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Basti News: पैदल... जाेखिम... जाम... तब बाबा का धाम

Tue, 11 Jul 2023 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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भदेश्वर नाथ मंदिर परिसर में तेरस पर जला​​भिषेक कराने के लिए हो रही तैयारी।
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बस्ती। पैदल भी चलना है... जोखिम भी उठाना है ... खतरे से खेलना भी है। इससे उबर पाएंगे, तब पहुंचेंगे बाबा के धाम। यह कठिन परीक्षा किसी और को नहीं कांवड़ लेकर चलने वाले शिवभक्तों को ही देनी है। इस बार व्यवस्था की खामियां कुछ ऐसा ही संकेत दे रही हैं। डारीडीहा से बाबा भद्रेश्वरनाथ मंदिर तक किया जा रहा प्रबंधन श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बन सकता है। इसका आभास यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पहले ही सोमवार को हो गया।
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आस्था की नगरी बाबा भद्रेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं को भोलेशंकर के गर्भ गृह तक पहुंचने में पग-पग कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि अभी भीड़ कुछ खास नहीं थी। आसपास के लोग ही जल चढ़ाने के लिए पहुंचे। मंदिर के मुख्य मार्ग डारीडीहा से भद्रेश्वरनाथ पर रात 3 बजे से ही पुलिस का पहरा लग गया। मंदिर से तीन किलोमीटर पहले डारीडीहा चौराहे पर इस मार्ग को दो पहिया, ऑटो एवं चार पहिया वाहनों के लिए सील कर दिया गया।
पैदल ही लोगों को आने जाने दिया जा रहा था। यहां से दो सौ मीटर पहले टांगपारा गांव से होकर भद्रेश्वरनाथ तक जाने वाले मार्ग पर सुबह 5 बजे तक बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। श्रद्धालु मुख्य मार्ग को छोड़कर इसी रास्ते से मंदिर की ओर जाने लगे। लगभग दो किलोमीटर चलने के बाद भद्रेश्वरनाथ गांव के पास यह रास्ता नहर की पुलिया के पास बंद मिला। यहां बल्लियों के सहारे रास्ते को सील कर पुलिस मुस्तैद रही, जिससे वाहन आगे नहीं बढ़ पाए। लोग किसी तरह संभलकर पैदल बल्लियों के किनारे से होते हुए मंदिर जाने लगे।
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इधर दो घंटे के दौरान यह रास्ता वाहनों से भर गया। पुलिस बैरिकेडिंग खोलने को तैयार नहीं, ताकि लोग मंदिर के मुख्य मार्ग से वाहन लेकर बाहर निकल जाएं। कुल मिलाकर एक ही तरफ का रास्ता खुला था और बाकी तरफ के रास्ते बंद किए गए थे। भीड़ बढ़ती गई लोग जाम में उलझते गए।

सुबह पांच बजते-बजते बिगड़ गई स्थिति
सुबह पांच बजते-बजते टांगपारा मार्ग पर यातायात की स्थिति बिगड़ गई। सड़क पर वाहनों की कतार लग गई। पैदल भी लोग नहीं निकल पा रहे थे। राजाचक गांव में इस सड़क पर जाम लग गया। घंटों से फंसे श्रद्धालु व्याकुल होने लगे। आने वाले लोग गाड़ी छोड़ झाड़ियों के बीच और बांस बल्लियों के सहारे संभले कदम से मंदिर की ओर बढ़ रहे थे, वहीं लौटने वाले श्रद्धालु मायूस मुद्रा में जाम खुलने का इंतजार करते रहे। लगभग एक घंटे के बाद पुलिस आई, जब मौके की नजाकत से अवगत हुई तो सीलबंद रास्ते को मोटरसाइकिल निकलने भर के लिए खोलने को राजी हुई। तब जाकर इस मार्ग से जाम हटाने में दो घंटे से अधिक का समय लगा।
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भद्रेश्वरनाथ मंदिर के पास बंद कर दिए रास्ते
कहते हैं कि आस्था की नगरी में भीड़ संभालने के लिए जितने रास्ते होंगे उतना सुगम आवागमन होगा, लेकिन भद्रेश्वरनाथ मंदिर में व्यवस्था ठीक इसके उलट है। यहां पहुंचने के तीन रास्ते हैं। डारीडीहा, टांगपारा और कोठवा भरतपुर से तीन अलग-अलग मार्ग हैं। कांवड़ पर्व में मंदिर के पास कोठवा भरतपुर और टांगपारा से आने वाली सड़क को बंद कर दिया गया है। केवल डारीडीहा मार्ग को ही 100 मीटर पहले तक खुला रखा गया है। इसके बाद बैरिकेडिंग कर दी गई है। मंदिर परिसर से श्रद्धालुओं के निकलने की व्यवस्था चौतरफा न होने से भीड़ बढ़ जाती है।
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संकरी गैलरी से लाखों श्रद्धालुओं को प्रवेश दिलाने की तैयारी
श्रावण तेरस के दिन बाबा भद्रेश्वरनाथ मंदिर में दूरदराज के अनुमानित पांच लाख श्रद्धालु अयोध्या के सरयू तट से जल लेकर आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के पहुंचने का केवल डारीडीहा मार्ग निर्धारित किया गया है। वह भी मंदिर से सौ मीटर पहले गैलरी में तब्दील की जा रही है। जलाभिषेक के लिए बल्लियों के सहारे ढाई से तीन फीट चौड़ी गैलरी बनाई जा रही है। सवाल है कि लाखों की तादाद में श्रद्धालु इन संकरी गलियों से मंदिर तक कैसे पहुंचेंगे? जानकार बताते हैं कि अव्यवस्था का मुख्य कारण यही है। पिछले वर्ष भी यही व्यवस्था थी, भीड़ बढ़ी तो तमाम कांवड़ियों को जलाभिषेक के दौरान चोटिल होना पड़ा था।


मंदिर के गर्भ गृह के दो दरवाजे भी हुए बंद
इस बार मंदिर के गर्भ गृह में आधे हिस्से को लोहे की पाइप से बैरिकेड कर आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। चार दरवाजे हैं, तेरस के दिन श्रद्धालुओं का सैलाब गर्भगृह के आधे हिस्से में नहीं संभलेगा। चारों तरफ के दरवाजे खुले रहने पर जलाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं को बाहर निकलने में सहूलियत मिलती है। इस बार एक तरफ से घुसने और दूसरी ओर से निकलने की सुविधा नहीं है, जिससे अव्यवस्था फैलने की आशंका प्रबल है।

कांवड़ यात्री की सुनिए
अयोध्या के सरयू घाट से कांवड़ लेकर नंगे पांव चलते-चलते तीन दिन बीत जाते हैं। रास्ते भर न जाने कितने छाले पांव में पड़ते हैं और फूट जाते हैं। आस्था ऐसी कि असहनीय दर्द के बाद भी हम लोग पैदल चलते हैं। भद्रेश्वरनाथ मंदिर पहुंचने पर कष्ट और बढ़ जाता है। दो साल पहले तक व्यवस्था ठीक थी। अयोध्या हनुमानगढ़ी की तर्ज पर श्रद्धालुओं को एक मुश्त मंदिर में प्रवेश दिया जाता था। फिर रस्से से बाकी श्रद्धालुओं को रोक दिया जाता था। जलाभिषेक के बाद उस जत्थे को दूसरे रास्ते से निकाल दिया जाता था। इस क्रम से जलाभिषेक कराना काफी अच्छा था। अब बैरिकेडिंग कर संकरी गैलरी बनाई जा रही है। अन्य रास्ते बंद कर दिए जाते हैं। इस व्यवस्था में श्रद्धालु जलाभिषेक आसानी से नहीं कर पा रहे हैं। श्रद्धालु मंदिर से किस दिशा में बाहर निकलेंगे कुछ भी पता नहीं रहता। वह अपने साथियों से बिछुड़ जाते हैं। अन्य शिवालयों की तरह अर्घा भी नहीं है कि दूर से ही श्रद्धालु जलाभिषेक कर सकें।
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-मोनू पाठक, कांवड़ यात्री।
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