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Basti News: सोशल मीडिया के जरिये निजी जिंदगी में झांक रहे अपराधी

Fri, 01 Dec 2023 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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अक्सर सामने आ रही इन जानकारियों के बल पर अपराध की घटनाएं
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बस्ती। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी शेयर करके यदि आपको लगता है कि आधुनिक जमाने के साथ कदम-ताल कर रहे हैं तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। बल्कि ऐसा करके आप अपराधियों को अपनी निजी जिंदगी में झांकने का मौका दे रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें सोशल मीडिया पर शेयर की गई निजी जानकारी से रेकी करके घर में चोरी, हमला, अश्लील हरकत जैसी घटनाएं हुईं हैं। जानकार बताते हैं कि एक दौर था जब चोर घरों के आसपास की स्थितियों, सूखी नाली या गंदगी से यह अंदाजा लगाते थे कि घर में कोई नहीं है। आज लोग खुद अपराधियों को मौका देते हैं।
आईजी आरके भारद्वाज का कहना है ि सोशल मीडिया के जरिये साइबर अपराधियों को तमाम निजी जानकारी अनायास ही मिल जा रही हैं। कई लोग अपने जरूरी दस्तावेज जैसे आधार, पैन, डेबिट-क्रेडिट कार्ड ही नहीं बैंक की पासबुक की फोटो भी अपलोड कर देते हैं। इतना ही नहीं, अपने घर में होने या न होने के बारे में भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा कर देते हैं। यह अत्यंत जोखिम भरा होता है।
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केस एक-
पुरानी बस्ती क्षेत्र के नरहरिया मोहल्ला निवासी एक व्यक्ति ने पूरे परिवार के साथ वैष्णो देवी दर्शन करने जाते समय रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर एक तस्वीर फेसबुक पर शेयर कर दी। छह दिन बाद लौटकर आए तो घर के सारे ताले टूटे हुए मिले। चोर जेवरात लेकर चंपत हो चुके थे। पुलिस ने एक महीने के बाद चोरों को पकड़ा तो पता चला कि उसी तस्वीर को देखकर चोरों को पता चला कि घर में ताला बंद है।
केस दो
गांधीनगर के एक युवक को परिवार वालों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करके लाइक और कमेंट गिनने में काफी मजा आता था। वह बिना संकोच महिला सदस्यों की फोटो भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर देता था। परिवार की एक महिला सदस्य की ऐसी ही तस्वीर अपराधी ने एडिट करके आपत्तिजनक बना दिया और उसे परिचितों को भेजकर बदनाम करने की धमकी देने लगा। केस दर्ज कराने पर पुलिस पकड़कर ले गई तो पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे इंस्टाग्राम पर तस्वीरें मिली थीं।
एक तरह की बीमारी है सोशल मीडिया की लत
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया एक तरह की बीमारी का शक्ल लेती जा रही है। यह एडिक्शन एंजाइटी और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याएं भी पैदा कर रहा है। इसके अलावा यह उनके ऑनलाइन अपराधियों और साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस जाने का जोखिम भी बढ़ा देता है। बच्चों में यह लत अनिद्रा, मोटापे और दूसरी कई बीमारियों की गिरफ्त में आने का जोखिम बढ़ा जाता है। मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहने का यह एडिक्शन उनकी एकाग्रता में भी बाधक बनता है क्योंकि वे हर पांच-दस मिनट में यह जानते रहना चाहते हैं कि इस दौरान क्या नया हो चुका है। चीजें उनके अनुकूल न हों तो उन्हें गुस्सा आता है, उनमें आक्रामकता बढ़ती है और वे खुद को या दूसरों को नुकसान पहुँचाने के बारे में सोचने लगते हैं।
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इन धाराओं में हो सकती है कार्रवाई
इलेक्ट्रॉनिक रूप में किसी भी आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री को प्रसारित करने पर आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति की सजा को तीन सालों तक बढ़ाया जा सकता है। सिर्फ जेल ही नहीं दोषी के ऊपर जुर्माने का भी प्रावधान है। दूसरी बार या बाद की सजा के हालातों में सजा को बढ़ाकर पांच साल तक किया जा सकता है। साथ ही आईपीसी की धारा 153ए, 153बी, 292, 295ए और 499 के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ कोई अपमानजनक और आपत्तिजनक मैसेज साइबर वर्ल्ड में भेजता है तो इन धाराओं के तहत कार्रवाई बनती है। ऐसे अपमानजनक और आपत्तिजनक संदेशों में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करना, अश्लीलता फैलाना, धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना और मानहानि जैसे आरोप आते हैं। इन धाराओं के तहत अलग अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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