- साइबर अपराधियों के निशाने पर पहले भी आ चुके हैं अधिकारी
- एसपी के सीयूजी नंबर से अधिकारियों को जेल बदलने का दबाव बनाता था हैकर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। डीएम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाने से पहले भी साइबर अपराधी कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का सीयूजी नंबर हैक करके जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने और रंगदारी मांगने तक के मामले सामने आ चुके हैं। संदेह है कि साइबर अपराधी और भी अधिकारियों की फर्जी आईडी बनाए होंगे। आईजी आरके भारद्वाज के मुताबिक इसकी जांच कराई जा रही है।
इस तरह का सबसे पहला मामला 24 जुलाई 2019 को सामने आया था। जब गाजियाबाद में कॉल स्पूफिंग के जरिए रंगदारी मांगने के मामले का खुलासा हुआ था। गिरोह में पकड़े गए बृजभान नाम के आरोपी ने बयान दिया था कि यह खेल बस्ती से संचालित किया जाता है। जिसमें एक पुलिस अधिकारी का सीयूजी नंबर हैक करके उससे धमकी दी जाती थी। बाद में वह पकड़ा गया था। इसके बाद बस्ती की जेल में बंद नोएडा के कुख्यात गैंगस्टर रणदीप भाटी का नाम स्पूफिंग गिरोह चलाने वाले सरगना के रूप में सामने आया था। भाटी ने यहां के एसपी का ही सीयूजी नंबर हैक कर लिया था। उसी नंबर से जेल अधिकारियों को फोन करके अपनी जेल बदलने के लिए दबाव बनाता था। साढ़े तीन वर्ष तक वह बस्ती जेल में था।
तत्कालीन जेल अधिकारी बताते हैं कि पुलिस उच्चाधिकारी की सीयूजी से कॉल आने पर वह दबाव में आ जाते थे लेकिन शक होता था कि अधिकारी किसी गैंगस्टर की मदद करने का दबाव नहीं बना सकते। प्रकरण एसपी के संज्ञान में आने के बाद जांच कराई गई तो स्पूफिंग का निकला था।
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प्रतिबंधित कॉल स्पूफिंग से हैक करते थे नंबर
- जानकार बताते हैं कि कॉल स्पूफिंग वह तकनीक है, जिससे अपने नंबर की पहचान छिपाते हुए किसी अन्य दूसरे का नंबर हैक करके उससे कॉल करते हैं। इसमें असली नंबर वाले को पता ही नहीं रहता लेकिन अगले को कॉल या मैसेज करने पर नंबर उसी का शो होता है। कॉल स्पूफिंग इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर जुर्माना, तीन साल जेल या दोनों दंड का प्रावधान है। इसमें तीन साल की सजा के साथ 25,000 रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है।
बनाया था डीएम की फर्जी आईडी
- पिछले हफ्ते जिलाधिकारी बस्ती की फोटो लगाकर एक फर्जी आईडी बना ली गई थी। जिससे कई लोगों को रिक्वेस्ट भेजी गई। डीएम की फोटो लगी आईडी से जिसके पास भी रिक्वेस्ट गई वह हैरान रह गया। जानकारी होने पर साइबर थाने में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। टीम ने तकनीकी उपायों ने छानबीन करते हुए आईडी बनाने वालों चंदौली जनपद के मुगलसराय से जितेंद्र गिरी उर्फ पंकज गिरि व पिंटू पासवान को बुधवार को गिरफ्तार किया था।