बस्ती। शहर से सटकर बह रही कुआनो का पानी एक बार फिर काला पड़ गया है। पानी में घुले जहरीले रसायन से जलीय जीव मरने लगे हैं। पानी में उतराईं मछलियां देख जब राहगीर नजदीक पहुंचे तो पानी का रंग काला देख दंग रह गए। खबर मिलते ही प्रशासन भी हरकत में तो आया लेकिन फौरी तौर पर इसे लेकर कोशिश तक शुरू नहीं कर सका। वैसे तो चार-छह महीने पर कुआनो का पानी जहरीला होने या काला पड़ने की शिकायत आती रहती है। लेकिन हाल के कुछ महीनों में यह स्थिति नहीं आई थी। शनिवार को दक्षिण की ओर से शहर में आने वाले राहगीरों ने पानी का रंग काला पड़ा देख तट पर जुटने लगे।
काफी दिनों से कुआनो के अस्तित्व को लेकर चिंता जाहिर की जाती रही। कुछ संगठन कुआनो को बचाने की कवायद करते दिखे लेकिन सबने इस मुद्दे को इस्तेमाल करके छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि एक बार फिर इसके अस्तित्व पर संकट गहराने लगा है। एक ओर जहां जलकुंभी अपना साम्राज्य कायम करती जा रही है, जिससे जल प्रवाह रुकने लगा है। पानी का रंग भी काला पड़ने के बाद समस्या बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि हालत यही रही तो वह दिन दूर नहीं जब उपयोगिता के लिहाज से कवियों का विषय रही कुआनो का अस्तित्व मिटते देर नहीं लगेगी। एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि संबंधित अधिकारी को सजग कर दिया गया है।
वजह को लेकर दुविधा
कुआनो का पानी बार-बार काला क्यों पड़ रहा है, इसे लेकर दोहरी बात की जा रही है। पानी का सैंपल तो कई बार जांच के लिए भेजा गया लेकिन हर बार रिपोर्ट दबा दी गई। इसके पीछे वजह जो भी हो लेकिन, प्रशासनिक रवैया हमेशा सवालों के घेरे में रहा है। कुछ वर्ष पहले तत्कालीन एसपी वीपी श्रीवास्तव ने इसे लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर मुकदमा भी दर्ज कराया था, लेकिन बाद में उनके तेवर भी ठंडे पड़ गए।