बस्ती। शनिवार को आई आंधी में जगह-जगह बिजली के पांच पोल टूट जाने से पॉश एरिया समेत शहर के 12 से अधिक मोहल्ले के लोगों को 24 घंटे बाद भी बिजली नहीं मिल सकी। रात भर शहर की आधी से अधिक आबादी बिजली के लिए तरसती रही। पंखे झलकर और छतों पर टहल कर लोगों को रात गुजारनी पड़ी। रविवार को लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा। घर की टंकी खाली हो जाने से हैंडपंपों के पानी से काम चलाना पड़ा।
मुख्य अभियंता सीपी गुप्त ने बताया कि रात में ही पांचों पोल लगवा दिए गए थे, मगर गांव वालों के विरोध के चलते तार नहीं खींचा जा सका। रविवार को गांव वालों को समझाया गया, उसके बाद कार्य शुरू हो सका। बताया कि इसमें लगभग तीन घंटा समय बर्बाद चला गया, नहीं तो अब तक लोगों को बिजली मिल गई होती। उन्होंने देर सांय तक बिजली की आपूर्ति बहाल होने का भरोसा दिया।
शनिवार की रात और रविवार का दिन अमहट उपकेंद्र से जुड़े सिविल लाइंस, आवास विकास कालोनी, कटरा, न्याय मार्ग, विकास भवन, मालवीय रोड, पुराना डाकखाना सहित 12 मोहल्लों के लोगों पर भारी गुजरा। इस सीजन में पहली बार लोगों को बिजली का बड़ा संकट झेलना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को खाना बनाने से लेकर अन्य रोजमर्रा के काम निपटाने में उठानी पड़ी। पानी का संकट इस तरह रहा कि मोहल्ले के इंडिया मार्क टू हैंडपंप पर पानी के लिए लोगों को जूझना पड़ा। पीने के पानी के लिए लोग हैंडपंप पर टूट पड़े। बिजली के संकट के कारण 90 फीसदी घरों में लोगों ने टीवी ही नहीं खोली। यहां तक कि महिलाओं ने भी अपनी मनपसंद टीवी सीरियल को त्यागना पड़ा। जिन घरों में इन्वर्टर लगे थे, उनके यहां भी मुश्किल से कुछ ही घंटे पंखे चल सके।
उपकेंद्र पर ताला लगा कर्मी भागे
बस्ती। अमहट स्थित विद्युत उप केंद्र पर सुबह से ही ताला लगा हुआ है, यहां पर यह कोई यह बताने वाला नहीं है कि बिजली कब आएगी। इससे लोगों में गुस्सा है। एक तो इस उपकेंद्र के कर्मी शनिवार से सरकारी मोबाइल बंद किए हुए हैं, ऊपर से जब रविवार को उपभोक्ता उपकेंद्र पर गए तो वहां पर दोनों कमरों में ताला लगा देख और अधिक नाराज हो गए। उपभोक्ता राम नरेश, लक्ष्मी नारायन, राम बली, राजाराम आदि ने बताया कि बिजली विभाग का कोई जिम्मेदार यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि बिजली कब आएगी। अधिकतर अधिकारियों के मोबाइल बंद हैं।