बस्ती। तत्काल टिकट के अवैध धंधे में अब तक 28 की गिरफ्तारी व करीब 30 लाख रुपये के टिकटों की बरामदगी ने रेल अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस धंधे में मास्टरमाइंड की तलाश हालांकि पूरी नहीं हो सकी है, मगर आरपीएफ ने यह सुराग लगा लिया है कि यह धंधा कहां से होता है। आरपीएफ की जांच में यह तथ्य उभरा है कि इसमें अलग-अलग ठिकानों से काम होता है और सभी के मास्टरमाइंड अलग-अलग हैं।
आरपीएफ व रेलवे की विजिलेंस टीम ने तत्काल टिकट के एक और धंधेबाज को शुक्रवार को दबोचा। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार कि इस धंधे का संचालन मुंबई से हो रहा है। इसके लिए व्हाट्सएप का प्रयोग होता है। शुक्रवार को दबोचे गए आरोपी ने आरपीएफ को जो तथ्य दिए हैं उससे यह तय हो गया है कि तत्काल टिकट का यह धंधा मुंबई में बैठा मास्टरमाइंड नसीर संचालित करता है। सबसे पहली बार इसका खुलासा जुलाई माह में हुआ था, जब आरपीएफ के हत्थे अवैध तत्काल टिकट पर यात्रा कर रहे दो युवक दबोचे गए। इसके बाद आरपीएफ गुपचुप ढंग से इस पर काम करती रही। इसी बीच अगस्त माह में बड़ा खुलासा हुआ और इस धंधे में लिप्त कोच अटेंड सहित सात गिरफ्तार हुए और लाखों के तत्काल टिकट पकड़े गए। इस खुलासे के बाद रेल के उच्चाधिकारियों ने इसमें विजिलेंस की भी टीम बनाकर आरपीएफ को जोड़ दिया। इस गिरफ्तारी से यह खुलासा हुआ कि भोपाल से इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। इसके कुछ ही दिनों बाद कुछ और धंधेबाज दबोचे गए, लेकिन इस बार यह टिकट बरौनी से निकाला गया था। ताबड़तोड़ कार्रवाई ने धंधेबाजों का हौसला पस्त जरूर किया, मगर धंधे पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया। इस बीच और तथ्य भी आरपीएफ के संज्ञान में आए। कुछेक ऑनलाइन का काम करने वालों के नाम भी इस धंधे में शामिल पाए गए, जिस पर आरपीएफ नजर जमाए हुए है। चार जनवरी को गिरफ्तारी के बाद यह खुल गया है कि यह धंधा मुंबई से भी संचालित होता है। आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र यादव का कहना है कि छिटपुट तो यह कार्य आधा दर्जन महानगरों में है, मगर मुख्य रूप से मुंबई, भोपाल व बरौनी से हर साल करोड़ों का धंधा हो रहा है। कहते हैं कि इस धंधे के सरगना के अलग-अलग ठिकाने हैं उन पर आरपीएफ व रेलवे विजिलेंस टीम की नजर है। शीघ्र ही कुछ और लोग पकड़े जाएंगे।