पशुओं को बांग्लादेश भेज रहे तस्कर
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बस्ती। पश्चिमी यूपी के पशु तस्करों की मंजिल पश्चिम बंगाल नहीं बल्कि बांग्लादेश है। जहां पशुओं की 10 हजार से 50 हजार तक कीमत मिलती है। आगरा, मेरठ, मुजफ्फरपुर के अंतरजनपदीय पशु तस्करों का पश्चिम बंगाल के बड़े गिरोह से गठजोड़ है।
पुलिस प्रशासन में गहरी पैठ होने से कार्रवाई से पहले तस्करों को खबर मिल जाती है। हथियार बंद तस्कर लग्जरी गाड़ियों में आगे-पीछे लगे रहते हैं। इसीलिए तमाम कोशिश के बावजूद पुलिस शिकंजा नहीं कस पा रही है। सोमवार रात 11 जोड़ी गोवंशीय पशुओं को लेकर जाते समय गिरफ्त में आए हरियाणा प्रांत के नुद्दू जिले के पुनहाना थाने के सिगार निवासी कंटेनर चालक इरफान ने पुलिस को इस धंधे के तमाम ऐसे पैंतरे की जानकारी दी, जिसे सुनकर पुलिस सकते मंे आ गई। एक चक्कर के 25 हजार रुपये कमाने वाले इरफान ने बताया कि पूरे रास्ते में पड़ने वाली पुलिस, कस्टम आदि की टीमों की मुट्ठी गरम करने का खर्च भी व्यापारी देकर भेजता है। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस का कहना है कि झारखंड के महेशपुर और पाकुड़िया के रास्ते इन पशुओं को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मवेशियों को पहुंचाया जाता है। जहां पशुओं को टैग लगाकर स्थानीय बाशिंदों के जरिए जंगीपुर और उमरपुर के बांग्लादेश की सीमा के नजदीक होने के कारण कुछ इलाके सेफ जोन बने हुए हैं। पुलिस की छापेमारी में खास कामयाबी नहीं मिल पाती है। क्योंकि तस्करों को सटीक सूचना तंत्र सूचित कर देता है, जिससे दो-चार पशुओं के साथ ड्राइवर ही गिरफ्तार किये जाते हैं।