गैंगरेप के मामले में कोर्ट ने एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि एक अन्य आरोपी का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। वही इसी मामले में दो अन्य आरोपियों को रेप के प्रयास व एससीएसटी की धारा में चार-चार वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है।
मामला संतकबीरनगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के एक गांव का है। 15 वर्ष पुराने इस मामले में पीड़िता की मां ने पहली फरवरी 2001 को थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि वह रिश्तेदारी में पति के साथ गई। उसकी नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। दूसरे दिन जब वह लौटी तो उनकी बेटी ने बताया कि 30 जनवरी की रात में घर के सामने अलाव ताप रही थी कि उसी समय सुनील पाल, शशि, धर्मेद्र और बलिकरन आ गए।
सुनील और शशि उसका मुंह दबाकर उसे छप्पर में खींच ले गए। बारी बारी से दोनो ने उसके साथ रेप किया। इसके बाद धर्मेंद्र और बलिकरन ने भी उसके साथ रेप की कोशिश की। इसी दौरान उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर गांव के कुछ लोग आ गए, जिसके बाद सभी आरोपी जानमाल की धमकी देते हुए भाग निकले। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान शशि किशोर अपचारी घोषित हुआ। इस कारण उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में भेज दिया गया।
सुनील पाल को किशोरी के साथ रेप करने के मामले में आजीवन कारावास और एक लाख 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं धर्मेंद्र और बलिकरन को रेप के प्रयास व दलित उत्पीड़न में चार चार वर्ष की कठोर कैद और 13-13 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की धनराशि का 50 प्रतिशत पीड़िता को अदा करना होगा।