बस्ती। बाल श्रम कराने वाले 12 नियोजकों के खिलाफ चाइल्ड लेबर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। सभी पर 20-20 हजार रुपये के जुर्माने के साथ ही सीजेएम न्यायालय में वाद भी दायर किया गया है।
उप श्रम आयुक्त विनोद शंकर मिश्र ने बताया कि सभी बालकों को नियोजकों से छुड़ाकर उनके अभिभावकों के हवाले कर दिया गया है। बताया कि अगर इनमें कोई अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है तो उसके निशुल्क दाखिले की भी व्यवस्था है। बाल श्रम के खिलाफ चलाए गए अभियान में जिले के 12 बालक विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम करते पाए गए। बताया कि जिन नियोजकों के खिलाफ जुर्माना और वाद दायर किया गया, उनमें गांधीनगर के सूर्या स्वीट फास्ट फूड, बांसी रोड रुधौली के सुरेश कुमार वस्त्रालय, रुधौली में मिठाई, समोसे की दुकान के मोतीलाल, मालवीय रोड बस्ती के बालाजी स्वीट एवं चाट कॉर्नर, बस्ती रेलवे स्टेशन के सामने आकाश स्वीट, बनकटी के मेनरोड जयपुर स्वीट, बड़ेबन पुल के नीचे सुमित भोजनालय, गांधीनगर एसआर एडवाटाइजर, गांधीनगर कटेश्वरपार्क न्यू पवन आटोपार्ट्स, कंपनीबाग के दुर्गा ग्लास सेंटर प्लाई हार्डवेयर, जिला अस्पताल चौराहा सुरेश जलपान और रंजीत चौराहा के पास शुभलाल स्वीट का नाम शामिल है।
बाल श्रम कानून हुआ सख्त
बाल श्रमिकों को लेक सरकार ने इसके कानून को और भी अधिक सख्त बना दिया है। नए कानून के तहत अब नियोजक के साथ अभिभावक पर भी जुर्माना करने का प्रावधान है। उप श्रम आयुक्त ने बताया कि अब अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे से काम कराता है तो उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। पहले यह व्यवस्था नहीं थी।