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गैंगरेप में एक को आजीवन कारावास

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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अमर उजाला ब्यूरो 
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बस्ती। 
न्यायालय ने 25 वर्ष पुराने गैंगरेप के मामले में एक आरोपी को आजीवन कारावास तो तीन अन्य को 14-14 वर्ष के कठोर कैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक आरोपी को एक-एक लाख रुपये अर्थदंड भी अदा करना होगा। इसे न अदा करने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। 
विशेष लोक अभियोजक आनंद प्रिय मौर्य ने घटना का विवरण अदालत में प्रस्तुत किया। कहा कि लालगंज थाना क्षेत्र के रोसया बाजार निवासी मदन लाल गुप्ता एक दलित से बेगारी कराता था। मजदूरी मांगने पर दुर्व्यवहार करता था। दलित के विरोध करने पर उसने धमकी दी। 17 मार्च 1992 को भोर में उसकी अवयस्क पुत्री सिवान में गई थी। मदन लाल ने अपने गांव के अशर्फी, त्रिभुवन और नकहा के फूलचंद्र और राम जियावन की मदद से किशोरी को अगवा कर लिया। बनकटी-भरवलिया मार्ग पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। दूसरे दिन पुलिस ने त्रिभुवन और अशर्फी के कब्जे से किशोरी बरामद किया, किन्तु दोनों मौके से फरार हो गए। पांचों आरोपियों के विरुद्ध रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमा के दौरान राम जियावन की मौत हो गई। अन्य चारों के विरुद्ध सुनवाई हुई। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर जज अशोक कुमार सिंह ने मदन लाल गुप्ता को आजीवन कारावास तो अशर्फी, त्रिभुवन और फूलचंद्र को 14-14 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।   
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दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास
बस्ती। 
विशेष सत्र न्यायालय एससीएसटी अशोक कुमार सिंह ने दलित को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने के मामले में दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक को पचास-पचास हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करना होगा। इसे अदा न करने पर पांच वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि का पचास प्रतिशत मृतक की पत्नी को दिया जाएगा।
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विशेष लोक अभियोजक आनंद प्रिय मौर्य ने घटना का विवरण न्यायालय में रखा। बताया कि कोतवाली थाना क्षेत्र के हरदिया बुजुर्ग निवासी अनिल कुमार और सुनील कुमार दलित हैं। अनिल ने अपनी जमीन राम प्रसाद से बेचने को कही थी। इसमें गांव के सूर्यमणि पांडेय, राममणि पांडेय और लेखपाल कृष्ण मुरारी मध्यस्थ थे। राम प्रसाद ने इन लोगों को 2.10 लाख रुपये दिए थे। इसमें से अनिल को केवल एक लाख रुपये मिले जबकि 1.10 लाख रुपये बैनामा परमिशन के नाम पर हड़प लिए। राम प्रसाद जमीन पर कब्जा करने पहुंचे तो अनिल ने इसका विरोध किया, जिस पर राम प्रसाद ने अनिल को बताया कि बिचौलियों के माध्यम से 4.95 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। उक्त लोग अनिल पर बैनामा के लिए दबाव बनाने लगे, जिससे घबरा कर 17 सितंबर 2005 को अनिल ने जहर खाकर जान दे दी। इसकी रिपोर्ट मृतक के भाई प्रदीप ने कोतवाली थाने में दर्ज कराई। इसी रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल हुआ। आरोप पत्र के आधार पर न्यायालय ने सूर्यमणि और राममणि को सजा सुनाई। 
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