बस्ती। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अनिल कुमार की अदालत ने हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि की आधी रकम वादी मुकदमा को दी जाएगी।
विशेष लोक अभियोजक आनंद प्रिय गौतम ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि महुली थाना क्षेत्र के बरौली (अब संतकबीरनगर) निवासी रामसजीवन ने रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप लगाया कि मेरे गांव के पूर्णमासी से जमीन का विवाद चल रहा था। जिसकी बाबत 30 अगस्त 2001 को मौके पर लेखपाल आए थे। दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया। गांव के गुलाब चौबे के यहां पूर्णमासी हलवाही करते थे। बाग में पंचायत हो रही थी। जिसमें गुलाब चौबे, गिरीश और अन्य लोग भी मौजूद थे। रामसजीवन और उसके पिता सुक्खू की मौजूदगी में दोपहर 12 बजे गुलाब ने पूर्णमासी से कहा कि मैंने तुम्हारी जमीन कब्जा करा दिया था, अब पंचायत क्यों कर रहे हो। सुक्खू के प्रतिरोध करने पर गुलाब चौबे, मृत्युंजय और गिरीश मेरे पिता को सुक्खू को गाली देते हुए लाठी-डंडे और लात-घूंसे से मारे-पीटे। पिता के सिर में गंभीर चोटें लगीं। उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाथ नगर में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान सुक्खू की हालत नाजुक हो गई। डॉक्टर ने गोरखपुर रेफर कर दिया। साधन न मिलने के कारण गोरखपुर नहीं ले जा सके। रात करीब एक बजे अस्पताल में ही मौत हो गई। रिपोर्ट के आधार पर हत्या और दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ। गुलाब चौबे के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। आरोप तय होने के बाद बचाव पक्ष से झूठा फंसाए जाने की बात कही गई। वादी सहित कुल सात गवाहों के बयान हुए। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने हत्या के जुर्म में दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई।