बस्ती। बस्ती चीनी मिल के बंदी को लेकर मिल के श्रमिक पिछले 928 दिन से मिल गेट पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, मगर इनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं हैं। राजनेता मंच पर आते हैं, हमदर्दी दिखाते हैं, संसद में आवाज उठाने का आश्वासन देते हैं और मीडिया में छपने के लिए फोटो खिचवाकर चले जाते हैं। बाद में यह भी नहीं देखते आते कि श्रमिक किस तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है। श्रमिकों का यह दर्द बुधवार को डीएम कार्यालय पर किए गए धरना प्रदर्शन के दौरान छलका।
धरने को आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राज्य प्रवक्ता श्याम मनोहर जायसवाल ने कहा कि चीनी मिल प्रबंधन और सरकार मिलकर श्रमिकों का आर्थिक शोषण करने में लगी हुई है। सरकार श्रमिकों का साथ न देकर पूंजीपतियों का साथ दे रही है। कहा कि घाटा दिखाकर चीनी मिल को बंद करके श्रमिकों के परिवार के साथ धोखा किया जा रहा है, कहने तो सभी सरकारें श्रमिकों की हितैषी बनती है, मगर असल में वह पूंजी पतियों का साथ देती हैं। यही कारण है कि सरकार ने आज तक किसी मिल प्रबंधन को जेल नहीं भेजा।
जबकि किसानों का करोड़ों दबाएं बैठी हैं और किसानों के पैसे से अन्य व्यापार करती हैं। कहा कि राजनेता भी श्रमिकों का सहारा लेकर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। श्रमिकों की नजर में मिल प्रबंधन से अधिक राजनेता दोषी हैं। कहा कि इसी स्थान पर पिछले 21 मार्च को धरना प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन दिया गया था, मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कहा कि दबाव के चलते प्रबंधन ने श्रमिकों की रिटेनिंग का भुगतान कर दिया, मगर लिखित देने के बाद भी नियमित बैठक भत्ता नहीं दिया गया।
जबकि श्रम विभाग भी इसमें शामिल है। इंटक के मंडल अध्यक्ष रमेश कुमार सिंह ने कहा कि मिल प्रबंधन के समश्र श्रम विभाग अपने आपको असहाय महसूस कर रहा है। समय बीतने के बाद भी श्रमिकों का रिटेनिंग एलांउस नहीं दिलाया गया। धरने को केके मिश्र, तिलक प्रसाद, रामनरेश, रामबृक्ष यादव सहित अन्य ने भी संबोधित किया। इस मौके पर अमरनाथ, गजराज, मायाराम, सुखराम, बच्चन, राजेंद्र प्रसाद, रामदीन, रामनाथ गौड़, दयाराम, ताराप्रसाद पांडेय, जगन्नाथ पांडेय, रामजी यादव, मुन्नर, राम मगन, राघवेंद्र सिंह, रमेश चंद्र, मुसई, रामभवन, अमूतलाल, रामभरत, राम मिलन, राम बघेर, रामनरेश यादव आदि मौजूद रहे।