पैकोलिया। थाना क्षेत्र के बेलभरिया रामगुलाम गांव में 22 जनवरी की दोपहर
मां और तीन बच्चियों की जलने से हुई मौत के मामले में दिवंगत रीता के पिता
ने उसके पति, सास और ससुर के विरुद्ध हत्या और दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज
कराया है। उनका आरोप है कि बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और
लगातार तीन बेटियां होने पर ताना मारा जाता था।
बेलभरिया रामगुलाम
गांव में राजकुमार की पत्नी रीता और उसकी बेटियां, छह वर्षीय लालती, चार
वर्षीय शांति और दो वर्षीय दुर्गावती की 22 जनवरी की दोपहर संदिग्ध हालत
में लगी आग में अपने कमरे में झुलस गई थीं। ीता, शांति और दुर्गावती की तो
मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि लालती ने जिला अस्पताल में दम तोड़ा था।
घटना के कारणों को लेकर कई तरह की चर्चा चल रही थी।
अधिकांश लोगों
का मानना था कि आर्थिक तंगी के कारण मां अपने बेटियों के साथ आत्मदाह कर
लिया। कुछ लोगों ने उसके पास राशन कार्ड न होने की बात भी कही। घटना के
दूसरे दिन शनिवार को इस मामले में नया मोड़ तब आ गया जब विवाहिता रीता के
पिता अकला थाना छावनी निवासी सीताराम और मां सिरमती पैकोलिया थाने पहुंचीं।
सीताराम ने बताया कि उनकी पांच लड़कियों में से दो बेलभरिया
रामगुलाम में ही ब्याही हैं। पहले नंबर की पूनम पप्पू के जबकि तीसरे नंबर
की रीता राजकुमार के साथ ब्याही थी। चौथे नंबर की पुत्री 12 वर्षीय शीला
रीता के घर आई थी। मंगलवार को जब वह उसे लिवाने आए तो पता चला कि रीता का
उसके सास-ससुर से झगड़ा हुआ था।
दामाद राजकुमार ने रीता को मारा
पीटा भी था। रीता ने अपने जेठ के मोबाइल से फोन कर यह भी बताया था कि उसके
ससुराल वाले लगातार तीन बेटी जनने पर उसे ताना मारते हैं। उसका पति भी इसी
वजह से उसे ताना मार कर पीटता था।
सीताराम ने पुलिस को तहरीर देकर
आरोप लगाया कि ससुराल वालों ने उसकी बेटी रीता को दहेज के लिए मार डाला और
तीन मासूम बच्चियों को जिंदा जला डाला। पुलिस ने तहरीर के आधार पर सास
मिथिलेश कुमारी पत्नी रामसुख, ससुर रामसुख और पति राजकुमार के विरुद्ध तीन
बच्चियों की हत्या और रीता की दहेज के लिए हत्या आदि धाराओं में मुकदमा
पंजीकृत किया है।
मुकदमे को लेकर खड़े हुए सवाल
दिवंगत रीता के
पिता सीताराम की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटना के दौरान पति राजकुमार खेतों में काम कर रहा था। जानकारी होने पर वह
भागा हुआ घर आया था। उस पर पत्नी और तीन मासूम बेटियों को जलाकर मार देने
का आरोप किसी के गले से नहीं उतर रहा है। सास-ससुर भी उससे अलग रहते हैं।
ऐसे में उनको भी घटना में शामिल बताया जाना भी सही नहीं लग रहा है।