फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध खनन से कई गांवों के अस्तित्व पर संकट

विज्ञापन
दुबौलिया क्षेत्र में किया जा रहा खनन। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
बस्ती। विक्रमजोत से संतकबीरनगर की सीमा तक चार स्थानों का खनन के लिए पट्टा हुआ है। इससे हटकर करीब एक दर्जन स्थानों पर रात के अंधेरे में खनन कार्य चल रहा है। सुरक्षा का अहसास दिलाने वाला वीडी बांध खुद खतरे में पड़ गया है। बाढ़ खंड पहले ही खनन पर विरोध जता चुका है। अभी तक करीब एक दर्जन गांव नदी की धारा में समा चुके हैं। 
विज्ञापन

जिले में महुआपार खुर्द, महुआपार कला, बरदिया लोहार और विक्रमजोत में खनन स्थल है। जबकि इससे हटकर करीब दो दर्जन स्थलों पर अवैध खनन का कार्य चल रहा है। दुबौलिया के माझा क्षेत्र में वीडी तटबंध के निकट कई जगहों पर मजदूरों के सहारे ट्रॉली से बालू निकाल कर स्थानीय स्तर पर ही बिक्री हो रही है। यहां बरदिया लोहार में पट्टा है। पहड़वापुर व खलवापुरा जैसे गांव तीन वर्षों में ही नदी कि धारा में समाहित हो गए हैं। ऊंजी माझा, केवाड़ी माझा, मोजपुर, देवारागंगबरार व रमनातौफीर आदि जगहों पर रात के अंधेरे में खनन बेधड़क हो रहा है। जिसके चलते पांच साल पहले जहां घाघरा नदी वीडी बांध से चार किलोमीटर दूर बहती थी अब पारा गांव से लेकर दुबौलिया कस्बे तक तटबंध से सटकर बह रही है। प्रभारी निरीक्षक पंकज गुप्ता का कहना है अवैध खनन हरहाल में नहीं होने दिया जाएगा। 
दुबौलिया क्षेत्र के ऊंजी माझा, केवाड़ी माझा, मोजपुर, देवारागंगबरार व रमनातौफीर, पिपरापाती तटबंध के उत्तर तरफ बसे टेगरिहा, चिलवनिया, मटियरिया, मसोढ़वा, परेवा, बैसिया खुर्द गांवों के वजूद पर खतरे का बादल मंडराने लगे हैं। विक्रमजोत के मुडेरीपुर, छतौना, बाघानाला, केशवपुर, चंद्रपलिया, भौसिया, बेतावा, रानीपुर कठवनिया में बांध को काट कर रास्ता बना लिया गया है।  
विज्ञापन

छावनी क्षेत्र में सहजौरा पूरेदुखी, शिवपुर, अ बरा, दुधौरा, मड़ना, बैदोलिया, कुकरहा, जमुवार, चकिया, बेतहवा, गोविंदापुर, अराजी भगला, पूरेदमरी, अचलपुर, पूरे जय सिंह, पूरे परई, पड़ियाडीह आदि गांव वर्षों पूर्व घाघरा नदी की घारा में विलीन हो चुके हैं। 
कुदरहा कार्यालय के अनुसार बालू से राजस्व प्राप्त करने के लिए प्रशासन ने करीब दो दर्जन गांव के अस्तित्व को दांव पर लगा दिया है। बंधे की सुरक्षा का जिम्मेदार बाढ़ खंड के तकनीकी सवाल खड़ा करने के बावजूद पट्टा स्वीकृत कर दिया गया है। अब तली से बालू हटने के बाद गहरे हुए तट की तरफ धारा मुड़ जाएगी। इससे कलवारी-रामपुर तटबंध पर टेगरिहा राजा से लेकर पिपरपाती गांव तक खतरा बढ़ गया है। तटबंध के उत्तर तरफ बसे टेगरिहा, चिलवनिया, मतटियरिया, मसोढ़वा, परेवा, बैसिया खुर्द एवं पिपरपांती आदि गांवों के वजूद पर खतरे का बादल मंडराने लगे हैं। माझा खुर्द की जगह टेगरिहा राजा गांव के सीवान में हो रहे खदान से ग्रामीणों में काफी गुस्सा है। कई बार सही सीमांकन कराकर बालू खनन कराए जाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन आंख मूंदे हैं। इतना ही नहीं दिन रात ओवर लोड ट्रकों से बालू ढुलाई के कारण कुदरहा गांव के लोगों का जीवन नर्क बन गया है सड़क टूट गई है। उसपर कीचड़ पसरा हुआ है। राजस्व का भारी नुकसान हो ही रहा है वहीं सड़कें टूट जा रहीं हैं। प्रशासन कभी कभी ओवर लोड गाड़ियों का चालान कर काम चला लेता है।
उधर, छावनी क्षेत्र में सर्वाधिक बालू खनन होता है। यहां पहरुओं से सामंजस्य बनाकर बालू माफिया मोटी रकम कमाते हैं। प्रत्येक वर्ष बाढ़ लौटने के बाद घाघरा नदी अपने कछारों में बडे़ पैमाने पर बालू सील्ट के रूप में जमा कर देती है। जो जनपद कि सीमा से छह किमी तक नदी किनारे तक फैली है। हाल के दिनों में नदी के किनारे वीडी बांध के समानांतर लोलपुर विक्रमजोत बांध बन जाने से इन पर निगरीनी ज्यादा बढ़ गई फिर भी बालू माफिया स्थानीय पुलिस और राजनैतिक संरक्षण से मुडेरीपुर, छतौना, बाघानाला, केशवपुर, चंद्रपलिया, भौसिया, बेतावा, रानीपुर कठवनिया में बांध को काट कर रास्ता बना लिया गया है।  
इसी क्रम में शंकरपुर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जगदंबा यादव का कहना है कि बालू का खनन यहां का ट्रेंड है। फोरलेन से लेकर गांव व कस्बे की सड़कों पर बालू लदे वाहनों के आवागमन से चलना दूभर हो जाता है। गर्मी और हवाओँ से बालू उड़कर आंखों में पड़ते हैं और सेहत के लिए हानिकारक भी है। फिर भी विरोध करना कठिन है। सत्ता के संरक्षण में इसके नये ठेकेदार निकल आते हैं।
छावनी निवासी भट्ठा मालिक बब्बू सिंह ने बताया कि क्षेत्र में बालू के ठेके नहीं होने से गोंडा और फैजाबाद से बालू मंगाना महंगा पड़ता है। जबकि बालू खदानों से सस्ते में मिल जाता है। जिसकी व्यवस्था आर्डर लेने वाला बालू एजेंट सांठ-गाठ से कर देता है। कल्याणपुर निवासी केशवचंद्र पाण्डेय ने बताया कि घाघरा की कटान के चलते मेरे गांव का अस्तित्व खतरे में है। पिछले चार सालों में भारी पैमाने पर हुए बालू खनन से नदी का रुख गांव की ओर हो गया है। सात गांवों की आधी से अधिक जमीन नदी में समा चुकी है। जिम्मेदार अवैध खनन है। प्रशासन खनन माफिया के आगे बेदम साबित होता आया है।

अब तक हुई कार्रवाई
विक्रमजोत-लोलपुर बांध किनारे बालू के अवैध खनन की सूचना पर छावनी थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने मई में ही भदोई गांव में एक साथ छह ट्रैक्टर ट्रॉली व एक बोलेरो बरामद कर सीज किया था। साथ ही अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया। 
2014 में कल्याणपुर में सीमा बांटने को लेकर दो पक्षों में गोली चली। तत्कालीन चौकी प्रभारी एमआर खान ने अपनी सर्विस रिवाल्वर निकाल कर दोनों को काबू में किया था । 
2015 में सीतारामपुर माझा में बड़ी संख्या में ट्रॉली, ट्रक व जेसीबी पकड़ी गई थी। थाने पर ले जाते समय छुड़ाने के लिए खनन माफिया के एक गुट ने हाईवे पर जाम लगाकर पुलिस कब्जे से जबरदस्ती वाहनों को छुड़ा लिया।  
4-2015 मे क्षेत्रीय खनन निरिक्षक प्रभारी अर्जुन कुमार पर भी खनन माफियाओं कि मुठभेड़ हो चुकी है। मगर राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। 
दुबौलिया क्षेत्र में मई में रमनातौफीर पर अवैध खनन में लगी ट्रॉलियां जिला प्रशासन ने सीज की है। 
अवैध धंधेबाजों की गुुंडई इतनी कि घाघौवा चौकी के पास एसडीएम हर्रैया से जांच के दौरान हाथापाई हुई जिसका परशुरामपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रभारी क्षेत्रीय खनन अधिकारी डॉ. गौतम कुमार दिनकर ने बताया कि मुझे अक्सर अवैध खनन की शिकायत मिलती है। धरपकड़ कर कार्रवाई भी की गई लेकिन पुलिस और नेताओं के सहयोग से प्रभावी एक्शन नहीं लिया जाता है जिससे  दोबारा खनन में लिप्त हो जाते हैं।

सूचना पर हो रही है कार्रवाई: प्रभारी डीएम
जिले के दो दर्जन स्थानों पर बालू के अवैध खनन के संबंध में प्रभारी डीएम/सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि सदर और हर्रैया एसडीएम को अवैध खनन रोकने के लिए अलग से जिम्मेदारी दी गई है। जहां सूचना होती है तत्काल उस पर कार्रवाई की जा रही है। अभी बरदिया लोहार में अवैध खनन की सूचना आई है। तहसील प्रशासन  की पूरी टीम लग गई है। किसी भी कीमत पर जिले में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें