विश्वामित्र इंडिया परिवार का पास बुक।
विश्वमित्र नाम से थाना क्षेत्र के महुआर कस्बे में कार्यालय खोलकर क्षेत्र के तमाम लोगों का लाखों रुपये बटोर कर एक कथित फाइनेंस कंपनी के कर्ताधार्ता फरार हो गए। रुपये जमा कराए कंपनी के एजेंटों से जब लोगों ने रुपये वापस मांगा तो वे मारपीट पर आमादा हो गए। बृहस्पतिवार को प्रकरण पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी।
2004 में रुधौली-डुमरियागंज मार्ग पर विश्वामित्र इन्डिया परिवार के नाम से एक कथित प्राइवेट फाइनेंस कंपनी की शाखा खुली। जिसमें थाना क्षेत्र के हनुमंता निवासी रामफेर मौर्या, विद्या सागर साहू और हसनी निवासी संजय चौहान बतौर एजेंट कार्य करने लगे। इन सबने अपनी जान-पहचान के तमाम लोगों के रुपये जमा कराए। तमाम लोगों ने अपनी जमा पूंजी एक वर्ष के लिए जमा कर दिया, जिसकी परिपक्वता वर्ष 2015 में ही थी। समय पूरा ॎोने के बाद भी जब लोग अपना पैसा ब्याज सहित वापस मांगने लगे तो वे टरकाने लगे।
पिछले एक वर्ष से मांगकर आजिज आ गए। भाजपा जिला मंत्री रवि सिंह के साथ थाने पहुंचे लोगों का कहना है कि इधर जिक्र करने पर वे लोग मारपीट पर आमादा हो जाते हैं। पडोस के विकास गुप्ता ने बताया कि वह लगभग डेढ वर्षो से यहा रेडिमेड की दुकान चला रहे हैं। पिछले लगभग आठ-नौ महीने से बगल के कमरे में चल रही प्राइवेट कंपनी की आफिस बंद पड़ी है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि तहरीर लेकर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।