बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनमीत सिंह सूरी की अदालत ने हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पिता-पुत्र समेत पांच को उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिसे न अदा करने पर दो वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
कोर्ट में शासकीय अधिवक्ता अब्दुल समद व प्रशांत भारती एडवोकेट ने घटना का विवरण रखा। बताया कि लालगंज थाना क्षेत्र के डीही खास निवासी सुक्खू ने थाना लालगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई। कहा कि गांव में नीम के पेड़ को काटने को लेकर गांव के हरीराम और उनके परिवार वालों से कहासुनी हुई थी। 15 जुलाई 2012 को दोपहर साढ़े 12 बजे गांव के हरीराम, उनके लड़के बेचन प्रसाद, सुनील व बेचन के लड़के रोहित तथा विनोद प्रसाद एक राय होकर उसके भाई शीतबसंत को गालियां देने लगे, विरोध और तकरार सुनकर परिवार की माया, गुड़िया, श्यामकली, अमित, आरती, मनोज आदि पहुंचे और बीच बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की। मुल्जिमान बेचन आदि गुस्सा गए। बचाव में आए लोगों को और उन्हें मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। शीतबसंत को जान से मारने की नीयत से सीने पर चढ़कर गला दबाकर हत्या कर दी। रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज होकर पांचों के विरुद्ध मारपीट कर घायल करने व एकराय होकर हत्या करने के जुर्म में आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन पक्ष से वादी मुकदमा सुक्खू और घायलों सहित 15 गवाहों के बयान हुए। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने बेचन प्रसाद, सुनील, हरीराम, रोहित व विनोद प्रसाद को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। तथा अर्थदंड से प्राप्त धनराशि का 50 प्रतिशत वादी मुकदमा को नियमानुसार दिए जाने का आदेश दिया है।
दहेज हत्या में पति को 10 वर्ष की सजा
बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक हर्ष अग्रवाल की अदालत ने दहेज हत्या में पति को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही छह हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिसे न अदा करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
शासकीय अधिवक्ता जय गोविंद सिंह ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि लालगंज थाना क्षेत्र के पगार निवासी अमित कुमार ने एसओ कप्तानगंज को तहरीर दी। बताया कि उसने बेटी पिंकी की शादी कप्तानगंज थाना क्षेत्र के राजजोत गांव में राघव के लड़के अवधेश से चार मई 2014 को किया था। हैसियत के हिसाब से दान-दहेज देकर विदाई की थी। ससुराल में पति अवधेश, ससुर राघव, अवधेश के बाबा रामचेत एक लाख रुपये ऑटो रिक्शा खरीदने के लिए मायके से लाने के लिए पिंकी पर दबाव बनाने लगे। जिसे देने में मजबूरी बताई। 23 जुलाई 2015 को पिंकी ने घर पर फोन कर बताया कि एक लाख रुपये की व्यवस्था नहीं हुई तो ये लोग मेरी हत्या कर देंगे। उसी दिन मिट्टी का तेल डालकर जला दिए। इलाज के दौरान 27 जुलाई 2015 को लखनऊ में मृत्यु हो गई। अभियोजन की तरफ से वादी सहित आठ गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि पिंकी स्वयं जल गई। मुकदमे के दौरान ही ससुर राघव की मृत्यु हो गई थी। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने अवधेश को दोषी मानते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई।