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घाघरा में समाए अपनों के तलाश की टूटी उम्मीद 

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अपराध्‍ा - फोटो : amaruajala
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दुबौलिया।
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घाघरा नदी की धारा में लापता हुए तीन किसानों के परिवार के लोग लगातार 11 दिनों तक ठंड और कोहरे की परवाह किए बगैर किनारे जमे रहे। अपनों के लिए उनका धैर्य इस कदर भारी रहा कि मिलने की आस में न तो उन्हें ठंड डिगा सकी और न ही प्रशासन। मगर रविवार को लापता तीनों किसानों के परिवार वाले गांव लौट गए। 
बीते 28 दिसंबर की देर शाम पारा गांव के निकट 25 लोगों से भरी नाव घाघरा नदी में पलट गई थी, जिसमें 21 लोगों को ग्रामीणों और मछुआरों ने सुरक्षित बचा लिया था। इस नाव पर बैठे पारा गांव के मयाराम, पिपरी के छोटे लाल, सुरजीत तथा बीहड़ नदी की धारा में बह गए। तंत्र ने पूरी ताकत लगा दी, मगर लापता को खोज पाने में नाकाम रहे। हालांकि, नौवें दिन बीहड़ का शव किशुनपुर गांव के निकट ग्रामीणों के सहयोग से खोज लिया गया, मगर तीनों का अब तक पता नहीं है। नदी में गायब हुए ग्रामीणों की तलाश में अंबेडकर नगर और संतकबीर नगर तक प्रशासन और ग्रामीण संपर्क बनाए हुए है। 11 दिन बाद रविवार को लापता के परिजनों ने घाघरा मइया के हवाले अपनों को छोड़ दिया और घर लौट लिए। लापता छोटे लाल के पुत्र शनि व मयाराम के पुत्र रमेश व राकेश को अपने पिता के मिलने की उम्मीद अब भी कायम है। आंखों में आंसू लिए कहते हैं कि घाघरा मइया मेरे पिता को वापस लाएंगी। 
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अंबेडकर नगर तक खोजी पुलिस 
रविवार को दुबौलिया पुलिस ने मोटरबोट से डूबे किसानों को पुलिस खोजती रही।12 बजे से शाम पांच बजे तक चले तलाशी अभियान के बावजूद परिणाम शून्य रहा। नदी में दूर-दूर तक लापता को खोजा नहीं जा सका। 
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प्रशासन करेगा पीड़ित परिवारों की सहायता 
शनिवार को डीएम अरविंद कुमार सिंह और एस पी संकल्प शर्मा पिपरी गांव जाकर पीड़ित परिवार से मिले और किसानों के परिजनों को ढांढस बंधाया। डीएम ने कहा कि प्रशासन हर सम्भव सहयोग करेगा। 
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