हर्रैया। पंचायत चुनाव के दौरान बेबहना गांव में हत्या के मामले में आरोपी
लजघटा गांव निवासी राघवेंद्र प्रताप सिंह की पुलिस अभिरक्षा में इलाज के
दौरान हुई मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर बुधवार को
परिवारीजनों के साथ क्षेत्रीय लोगों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर धरना
दिया। राज्यपाल को संबोधित दो सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार को दिया।
पंचायत
चुनाव के दौरान छह अक्टूबर को बेबहना गांव निवासी पूर्व प्रधान राम पाल
सिंह की वाहन से कुचल कर हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक के पुत्र की
तहरीर पर राघवेंद्र प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाते हुए पांच को अभियुक्त
बनाया गया था। घटना के पंद्रह दिन बाद पुलिस ने राघवेंद्र को गिरफ्तार कर
जेल भेज दिया था।
जेल में रहते हुए राघवेंद्र की तबीयत खराब हो गई
और उसे लखनऊ मेडिकल कालेज भेजा गया। कुछ दिनों बाद सुधार होने पर उसे फिर
जिला जेल लाया गया। मगर एक सप्ताह बाद ही तबीयत खराब होने पर कोर्ट के आदेश
पर उसे फिर लखनऊ भेजा गया।
जहां इलाज के दौरान ही 11 जनवरी को
पुलिस अभिरक्षा में राघवेंद्र सिंह की मौत हो गई। परिवारीजनों ने राघवेंद्र
की मौत को राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए कहा कि सपा नेता राघवेंद्र
विक्रमजोत ब्लॉक प्रमुख पद का दावेदार थे। विरोधियों ने उन्हें फर्जी हत्या
के मामले में फंसाया था। अस्पताल में अचानक हुई मौत राजनीतिक षड्यंत्र का
हिस्सा है।
बुधवार को भाई अरविंद सिंह के साथ बड़ी संख्या में
समर्थकों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत की
सीबीआई जांच कराने व मृतक के परिवार को पचास लाख रुपये का मुआवजा देने की
मांग करते हुए धरना दिया। अपना दल ने भी इसका सर्मथन दिया। इस मौके पर राम
सिंह पटेल, अर्जुन सिंह, रमाकांत सिंह, राजन सिंह, अरविंद सिंह पटेल, अरूण
सिंह, राजू सिंह, जीतू मिश्रा, राम सागर पांडेय, अमर पाल चौधरी, राम किशोर
चौधरी, कमलू गुप्ता, योगेन्द्र पटेल, शीलम यादव आदि मौजूद रहे।