सदर तहसील सभागार मंे पुलिस विभाग के विवेचकों की कार्यशाला को संबोधित करते डीएम नरेंद्र सिंह पटेल।
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बस्ती। अदालत में इंसाफ के तराजू का संतुलन तभी कायम रहेगा जब विवेचना में सावधानी बरती जाए। तभी अपराध पर नियंत्रण किया जा सकता है। निष्पक्षता और पारदर्शिता इसका सबसे जरूरी तत्व है। विवेचक और अभियोजन की जिम्मेदारी है कि वह इस संतुलन को कायम रखें। शनिवार को तहसील सभागार में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन इस मुद्दों पर विस्तार से न केवल चर्चा हुई, अपितु विवेचक व अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया गया।
जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह पटेल की अध्यक्षता में संयुक्त निदेशक अभियोजन भगौती शरण राम त्रिपाठी, एसपीओ वीबी मिश्र, डीजीसी क्रिमिनल जय सिंह, डीजीसी राजेंद्र शंकर द्विवेदी, सहायक अभियोजन अधिकारी जय गोविंद सिंह, एडीजीसी क्रिमिनल राम अनुज भास्कर, सीओ एसएन सिंह ने मौजूद विवेचकों इंस्पेक्टर/थानाध्यक्षों को बारीकियों से अवगत कराया। दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की धारा के अंतर्गत विवेचक को साक्ष्य संकलन के तकनीकी पक्ष को विस्तार से रखा गया।
पुलिस/विवेचक के सामने आने वाली तकनीकी दिक्कतों की चर्चा करते हुए इंस्पेक्टर रणधीर मिश्र ने पुलिस का व्यावहारिक पक्ष को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि अदालत में बचाव पक्ष ऐसे सवालों में पुलिस को उलझा देता है,जिनसे मुकदमे का कोई सरोकार नहीं होता। इस चक्कर में वह असली मुद्दे से कई बार भटक जाता है और पीड़ित पक्ष का हित प्रभावित होने लगता है। इस विषय पर रविवार को विस्तार से चर्चा होगी।
दरअसल, नौ अप्रैल को प्रमुख सचिव न्यायिक व डीजी अभियोजन के संयुक्त तत्वाधान में हुई दो दिवसीय कार्यशाला की उपयोगिता को देखते हुए बस्ती समेत सभी जनपदों में वर्कशाप के आयोजन का निदेश जारी किया गया था। रविवार को इसका समापन होगा।