बलात्कार के बाद जिंदा जलाया गया था
बस्ती। फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश कृपाशंकर शर्मा ने दुष्कर्म के आरोप में युवक को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और 11 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने पर तीन साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
मामला दुबौलिया थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने पुलिस को तहरीर दी कि 31 जुलाई 2014 को सुबह वह अपने गांव से पश्चिम शौच के लिए गई थी। इसी बीच वहां पहले से मौजूद एक युवक ने उसे पकड़ लिया और जबरन दुष्कर्म किया। जाते जाते घटना की जानकारी किसी को देने पर जानमाल की धमकी दी। पुलिस ने तहरीर के आधार मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। कोर्ट में अभियोजन की तरफ से पीड़िता सहित अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। बचाव पक्ष की ओर से घटना में झूठा फंसाए जाने की बात कही गई। वहीं मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं पाई गई।
अभियोजन की तरफ से मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता जय सिंह व जयगोविंद सिंह ने की। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जज ने माना कि रेप एक ऐसा अपराध है जिसमें कोई महिला किसी को झूठा फंसाए जाने के बजाए अपराध सहन कर लेती है। न्यायालय ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए आरोपी सुरेश उर्फ सूर्य नरायन निवासी साड़पुर को सात वर्ष के कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई।