बस्ती। कम उम्र में ही करोड़ों में खेलने वाला हामिद अशरफ इंजीनियर बनना चाहता था। वह आईआईटी से इंजीनियरिंग करने का सपना देख रहा था, पर वह न जाने कैसे गलत राह पर चल पड़ा। पुरानी बस्ती पुलिस के अनुसार, उसके दो मामा हैं। एक नसीम तो दूसरा वसीम।
नसीम पुरानी बस्ती के दक्षिण दरवाजा क्षेत्र में रहता था। शुरू में वह रेलवे टिकट निकालने का काम करता था। यह हुनर उसने अपने भांजे हामिद अशरफ को भी सिखा दिया। हामिद अशरफ का झुकाव शुरू से ही इंजीनियरिंग की ओर था। ऐसे में उसने अपने दिमाग को गलत दिशा की ओर मोड़ते हुए रेलवे की ओर से तत्काल टिकट निकालने वाले साफ्टवेयर में लगा दिया। उसने आईआरटीसी का डुप्लीकेट साफ्टवेयर तैयार किया और उससे रुपया कमाने की सूझी।
एएसपी रोहित मिश्र के अनुसार हामिद अशरफ ने डुप्लीकेट साफ्टवेयर पूरे देश में बेचे। एक एक हजार में उसने लोगों को साफ्टवेयर बेंचा। इतना ही नहीं उससे होने वाले कमाई में अपना हिस्सा भी लगाया। डिस्ट्रीब्यूटर्स उसे उसका हिस्सा उपलब्ध कराते थे। बताया कि रेलवे का तत्काल टिकट निकालने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स पूरे सेटअप को रात में ही तैयार रखते हैं और जैसे ही सुबह तत्काल टिकट निकालने का टाइम हुआ आटोमेशन मोड में जाकर उसे निकाल लेते थे।
पिता लड़े थे प्रधानी का चुनाव
कप्तानगंज। महा ठग हामिद अशरफ का मूल गांव कप्तानगंज का रमवापुर कला है। मगर उसका परिवार कप्तानगंज कस्बे के वायरलेस चौराहे पर आलीशान मकान बनाकर रहता है। उसके पिता जमीरुल हसन बल्ली पटरी का व्यवसाय करते है। हामिद दो भाई है, वह बड़ा है, जबकि चार बहने है, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। उसने पिछले साल अपने पिता को प्रधानी का चुनाव भी लड़ाया था।
आॅपरेशन में शामिल पुलिस के लोग
बस्ती। सीबीआई और रेलवे विजिलेंस टीम की छापेमारी में मदद करने वाली पुरानी बस्ती पुलिस टीम के सदस्यों में प्रभारी निरीक्षक रणधीर मिश्र, एसआई अरविंद कुमार, एसआई रामबृक्ष यादव, एचसीपी रामकरन और महिला सिपाही प्रीति पांडेय शामिल हैं।