बस्ती। प्रदेश में अधिवक्ताओं पर बढ़ रहे हमले और उत्पीड़न के खिलाफ सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्य नहीं किया। गिरती कानून व्यवस्था के विरोध में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एडीएम को दिया।
बार कौंसिल के आह्वान पर सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्य नहीं कर विरोध प्रदर्शन किया। लखनऊ विधानसभा का घेराव में नहीं शामिल हो पाने पर सोमवार को सिविल बार और जनपद बार के पदाधिकारियों ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद सिविल बार के मध्य गेट पर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदेश में दिनोंदिन गिर रही कानून व्यवस्था, अधिवक्ताओं पर हमले, अभद्रता व अराजकता पर विरोध जताकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मांग की है कि प्रदेश के जिन अधिवक्ताओं की हत्या हुई है उनके आश्रितों को क्षतिपूर्ति, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, परिवार की इच्छा पर शस्त्र का लाइसेंस दिया जाए। इसके अलावा बस्ती के अधिवक्ता जोखन कुमार को मारपीट कर घायल करने वालों की गिरफ्तारी व कार्रवाई की जाए।
इस दौरान बार अध्यक्ष हरिश्चंद्र प्रताप सिंह, महामंत्री दया शंकर दुबे, जनपद बार अध्यक्ष जवाहर लाल मिश्रा, महामंत्री रविशरण सिंह, प्रेमचंद मिश्र, दीपक वर्मा, विचित्र मणि उपाध्याय, आजाद सिंह, महेंद्र कुमार ओझा, रणविजय सिंह, रामचंद्र मिश्र, मनीष मिश्र, दिग्विजय सिंह, गौरी शंकर मिश्र, प्रवीण पांडेय, महेंद्र पाठक, शैलेंद्र प्रताप सिंह, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, इंद्र प्रभाकर, शरद चतुर्वेदी, रवि प्रताप, कौशलेंद्र पाल, अरविंद चौधरी आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।