कप्तानगंज (बस्ती)।
शुक्रवार की भोर में मोबाइल का चार्जर बोर्ड में लगाते समय युवक को करंट का तेज झटका लग गया। चीख सुनकर पहुंचे परिवार के लोगों ने करंट की सप्लाई काटी। बेसुध पड़े 30 वर्षीय विजय बहादुर को आनन-फानन एक निजी चिकित्सक के पास ले गए। जहां मृत घोषित कर दिया गया।
परिवार के लोग बताते हैं कि विजय बहादुर नींद खुलने के बाद मोबाइल को चार्जिंग में लगाकर नित्यक्रिया के लिए निकलते थे। शुक्रवार की भोर में भी नींद खुलने के थोड़ी देर बाद मोबाइल चार्जिंग पर लगाने लगे। उसी दौरान करंट की चपेट में आ गए। उनकी हालत देखकर सभी चीखने लगे। आनन-फानन स्थानीय डॉक्टर के यहां ले गए, जहां मृत करार दे दिया गया। विजय की शादी दिल्ली की रहने वाली रीना से हुई थी। तीन बच्चे रंजीत (7) मंजीत (4) के अलावा तीन साल की बेटी आकांक्षा हैै। इन दिनों रीना बच्चों के साथ मायके दिल्ली गई है। घर पर विजय बहादुर के माता-पिता और भाई मौजूद थे। डॉक्टर के मृत घोषित करते ही चीख-पुकार मच गई।
पहले भी करंट से हो चुके हैं हादसे
करंट लगने से मौत की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं लेेकिन उनसे सबक लेकर एहतियात बरतने में लोग फिसड्डी हैं। चार जून 2017 के दौरान परशुरामपुर क्षेत्र के मिश्रौलियाधीश निवासी 20 वर्षीय श्यामू की करंट से मौत के बाद परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराने को लेकर रास्ता जाम कर दिया था। टेंट हाउस में काम करते समय उसे करंट लगा था।
10 जुलाई 2017 छावनी थाने के डुहवा मिश्र निवासी सगे भाइयों की करंट से मौत हो गई थी। उनमें से एक रेलवे से रिटायर्ड कर्मचारी रामसुख और उनके दूसरे नंबर के भाई पंचम उम्र क्रमश: 65 और 70 साल को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया मगर उन दोनों की मौत काफी देर पहले ही हो चुकी थी। इससे पहले 13 अक्टूबर 2015 को कप्तानगंज क्षेत्र के इमिलडिहा गांव के 17 वर्षीय अनूप तिवारी की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई भी। सुबह के समय हल्की बूंदाबांदी शुरू होने पर घर के बाहर लगा टुल्लू पंप भीगने से बचाने के लिए ढकने गए। तभी करंट आने से वह चपेट में आ गए।
खराब अर्थिंग जानलेवा
एक निजी फर्म में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कार्यरत राजन प्रताप का कहना है कि घर या दफ्तर-फैक्ट्री के कनेक्शन में मजबूत अर्थिंग सबसे जरूरी है। समय और पैसा बचाने के लिए बिना अच्छी अर्थिंग के किया गया कनेक्शन जानलेवा हो सकता है। घर के पिलर अथवा हैंडपंप में ही अर्थिंग का तार जोड़ देने से अक्सर खतरा होता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले तकनीकी विशेषज्ञ की देखरेख में अर्थिंग बनवाना ही श्रेयस्कर है।