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व्यापारी परिवार ने खाया जहर, चार की मौत

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मौके पर पहुंचे एसपी। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। जिले के भुअर निरंजनपुर में रहने वाले व्यापारी परिवार ने सोमवार आधी रात को जहर खा लिया। पति-पत्नी और पुत्र-पुत्री समेत परिवार के चारों सदस्यों की मौत हो गई। आत्महत्या का कारण परिवार का कर्ज में डूबा होना बताया जा रहा है। व्यापारी परिवार मूल रूप से गोंडा जिले का रहने वाला था।
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सूत्रों के अनुसार गोंडा निवासी शिव कुमार जायसवाल (45) कोतवाली थाना क्षेत्र के भुअर निरंजनपुर में किराए के मकान में रह रहे थे। परिवार में पत्नी मीना (40), बेटा आयुष (17) और बेटी महक उर्फ मुस्कान (22) थी। शिव कुमार घी, मैदा, तेल आदि की सप्लाई का कारोबार करते थे। सोमवार रात करीब एक बजे पूरे परिवार ने जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर शिव कुमार ने पड़ोसी से जान बचाने की गुहार लगाई। लोगों ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी और चारों को जिला अस्पताल ले गए, लेकिन मीना की रास्ते में ही मौत हो गई।   शिव कुमार और आयुष ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महक की गंभीर हालत को देख डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया, जहां मंगलवार शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।      
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घर से मिला कीटनाशक का पैकेट
- पुलिस को व्यापारी के घर से कीटनाशक का पैकट मिला है। शहर कोतवाल विजेंद्र सिंह के मुताबिक शिव कुमार ने व्यापार के लिए बैंक से कर्ज ले रखा था। कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से परिवार परेशान था, क्योंकि उनके ऊपर कर्ज चुकाने का दबाव पड़ रहा था। पुलिस ने घटनास्थल से बरामद कीटनाशक के पैकेट और खाने के बर्तन को जांच के लिए भेजा है।     
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मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
- सामूहिक आत्महत्या की सूचना मिलते ही एसपी दिलीप कुमार व्यापारी के घर पहुंचे। इसके अलावा एएसपी पंकज, सदर एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल, क्षेत्राधिकारी (शहर) आलोक सिंह,  प्रभारी निरीक्षक कोतवाली विजेंद्र सिंह भी मौके पर मौजूद थे। फॉरेंसिक टीम साक्ष्य संकलन में जुटी हई थी। 



कर्ज के बोझ तले कुचल गया पूरा परिवार
  
बस्ती। दूसरे जिले में कारोबार कर परिवार के सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाले शिव कुमार जायसवाल का पूरा परिवार कर्ज के बोझ तले कुचल गया। शिव कुमार आठ माह पहले गोंडा से बस्ती पहुंचे थे और यहां रहकर कारोबार शुरू किया था।
सोमवार की रात पूरे परिवार के जहर खा लेने की घटना से हर कोई स्तब्ध है। किसी को भरोसा नहीं हो रहा कि मिलनसार स्वभाव के शिव कुमार ने ऐसा कदम उठा लिया। वैसे उनका परिवार संकोची स्वभाव का था। पत्नी, पुत्र और पुत्री किसी से भी अपनी परेशानी साझा नहीं करते थे। जहर खाने के बाद परिवार के चारों सदस्यों की मौत के बाद उनके घर लोगों का तांता लगा हुआ है। लोग देनदारियों और कर्ज की चर्चा कर रहे हैं।  
बस्ती आने के बाद शिव कुमार ने भुअर निरंजनपुर में शक्ति श्रीवास्तव के यहां किराए पर कमरा लेकर व्यापार शुरू किया था। वह मैदा, बेसन, आटा आदि थोक में लाकर घर पर पैकेट बनाकर छोटी दुकानों में सप्लाई करते थे। बताया जा रहा है कि शिव कुमार ने कारोबार के लिए बैंक से लोन लिया था। शुरुआत में बिजनेस कुछ ठीक नहीं चला और मार्केट में रकम फंसने लगी तो उन्होंने जानने वालों से भी कर्ज लेकर व्यापार जारी रखा। कर्ज करीब 20 लाख तक पहुंच गया तो वह तनाव में रहने लगे। देनदारों की रकम नहीं लौटा पाने से पूरा परिवार परेशान था। बेटी महक उर्फ मुस्कान 22 साल की हो चुकी थी। इस वजह से उसकी शादी की चिंता भी सता रही थी। इन्हीं कारणों ने इंटर के बाद बेटा आयुष पढ़ाई छोड़कर कारोबार में हाथ बंटाने लगा। पड़ोसियों ने बताया कि कर्ज देने वालों का दबाव काफी बढ़ गया था। इसी वजह से परिवार ने कीटनाशक खा लिया।
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रात एक बजे हुई जानकारी: विजय
- भुअर निरंजनपुर के रहने वाले विजय प्रकाश चौधरी व्यापारी परिवार की आत्महत्या से दंग हैं। बताते हैं कि रात एक बजे घटना की जानकारी हुई। परिवार ने ऐसा क्यों किया यह समझ से बाहर हैं। विजय का कहना है कि घटनास्थल पर पहुंचने पर बैंक से कर्ज की बात पता चली।      
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किसी से कोई विवाद नहीं था: अनुज
- पड़ोस में किराये पर कमरा लेकर रहने वाले अनुज कुमार ने बताया कि शिव कुमार का किसी से विवाद रहा हो इसकी चर्चा भी कभी नहीं सुनी। कभी-कभार बिजनेस ठीक से नहीं चलने की बात जरूर कहते थे। उन्होंने बैंक से कर्ज ले रखा था। इस बात को लेकर परिवार चिंतित रहता था।       
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आर्थिक स्थिति कमजोर थी: सुनील      
- सुनील कुमार बताते हैं कि शिव कुमार का परिवार बहुत सभ्य था। बच्चे भी अपने काम से ही मतलब रखते थे। आत्महत्या पर विश्वास कर लेना मुश्किल है। बैंक कर्ज से परेशान रहते थे।      
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डिप्रेशन में लोग करते हैं खुदकुशी : डॉ. मलिक
- मनोरोग चिकित्सक डॉ. मलिक अकमालुद्दीन कहते हैं कि डिप्रेशन व प्रतिकूल परिस्थितियों को मानव मस्तिष्क बर्दाश्त नहीं कर पाता है। इन स्थितियों में न्यूरो ट्रांसमिशन में सिरोटोनियम की कमी हो जाती है, जो उसे आत्महत्या को मजबूर करती है। ऐसे हालात में मानव मस्तिष्क के सोचने की क्षमता क्षीण हो जाती है और वह परेशान रहने लगता है। यह स्तर इतना घातक होता है कि उसके मन में  आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं आता।
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कर्ज की वजह से बेचना पड़ा था मकान
- बिजनेस शुरू करने के लिए शिव कुुमार ने बैंक से 2011 में सात लाख रुपये का कर्ज लिया था। बिजनेस को आगे बढ़ाने के लगातार प्रयास में घाटा बढ़ता गया। इसके बाद उन्होंने अपना मकान बेच दिया था। बेटी महक बीएससी प्रथम वर्ष और बेटा आयुष इंटर में पढ़ रहे थे। देनदारी का दबाव बढ़ा तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गयी। मकान बेचने के बाद शिव कुमार भुअर निरंजनपुर आ गए।  पत्नी का मायका भी यहीं है। शिव कुुमार के साले दुर्गा जायसवाल बस्ती में कोर्ट में लिपिक हैं। 
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