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फ्लाईओवर हादसा: टेंडर का टेंडर,गर्त में गुणवता

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टेंडर का भी टेंडर, गर्त में गुणवत्ता
थर्ड पार्टी से गुणवत्ता की जांच से पहले ही भरभराया फ्लाईओवर
तीसरे ठेकेदार के जिम्मे था ऊपरी हिस्से के निर्माण का काम
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकारी निर्माण कार्यों में टेंडर के बावजूद सेमी ठेकेदारी का फंडा जब से अख्तियार किया जाने लगा, तब से सड़कों पर गिट्टी उड़ने लगी। फोरलेन का फ्लाईओवर ही नहीं तमाम पुल-पुलिया और भवन की छतें भरभराकर ढहने के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
फुटहिया फ्लाईओवर के कांट्रैक्ट में तीन सेमी कांट्रैक्टर फर्म जुड़ी हुई हैं। तीनों के मुनाफा कमाने की कोशिश में गुणवत्ता गर्त में चली गई। सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने परियोजना निर्माण का ठेका हैदराबाद की कंपनी केएमसी लिमिटेड को दिया था। जिसके जरिए लखनऊ की कंपनी विजय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (वीसीआईपीएल) को 15 करोड़ के फ्लाईओवर का ठेका दिया गया था।
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नगर थाने के फुटहिया स्थित फोरलेन (एनएच-28) पर फ्लाईओवर का कार्य 60 फीसदी पूरा हो चुका था। 24 जुलाई को डीएम डॉ. राजशेखर ने वहां का दौरा किया था तो अधिकारियों ने दिसंबर तक कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था। डीएम ने हर संभव मदद का प्रस्ताव रखा। आसपास के किसानों की कुछ जमीन से संबंधित विवाद था, जिसके लिए एडीएम/सीआरओ को डीएम ने राजस्व मामलों को निस्तारित करने का निर्देश भी दिया था। आईआईटी रुड़की या कानपुर से थर्ड पार्टी क्वालिटी चेक का भी निर्देश दिया गया था लेकिन एक पखवारा भी नहीं बीता कि फ्लाईओवर का सच सामने आ गया।
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