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कांपते हाथों से पूरे परिवार की चिता में लगाई आग

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प्रेमचंद्र ने कांपते हाथों से दी चिताओं को मुखाग्नि
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कलवारी के टांडा घाट पर एक साथ छह चिताएं जलीं, छलक उठीं आंखें

कलवारी/बस्ती।
इलाके के लोग दरोगा प्रेमचंद्र मिश्र को मजबूत कलेजे वाले व्यक्ति के रूप में जानते आए हैं, मगर सोमवार को बहू-बेटे समेत परिवार के पांच लोगों को मुखग्नि देते उनके हाथ भी कांप उठे। जिस राह से एक साथ पूरे परिवार की अर्थी गुजरी, देखकर लोगों की आंखें भर आईं। पिता प्रेमचंद्र की रो-रो कर सूज चुकी आंखों में आंसू भी सूख चुके थे। जिस 22 वर्ष की भांजी के विवाह के विवाह वह ताना-बाना बुन रहे थे, उसकी जलती चिता को काफी देर तक देखते रहे। उनकी यह दशा देखकर मौजूद हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया।
रविवार की आधी रात को लुंबिनी-दुद्धी निर्माणाधीन हाईवे से सटे बेलवाडाड़ गांव में छह लोगों के शव लाए गए। शवों के पहुंचते ही गांव में चीख-पुकार और चीत्कार गूंजने लगी। पांच शव प्रेमचंद्र मिश्र के परिवार के ही थे। छठां शव प्रेमचंद्र की भांजी ज्योति उर्फ मुलकी का था, जिसे घंटे भर बाद सुअरहा उसके घर ले जाया गया।
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सोमवार की सुबह इंजीनियर पंकज उर्फ दिव्य कुमार, उनकी पत्नी साक्षी (26), बहन दिव्या (25) और दीपिका (23) के अलावा चचेरे भाई अर्पित मिश्र (14) की शव यात्रा बेलवाडाड़ से निकली। जबकि छठवीं लाश सुअरहा से टांडा घाट पर लाई गई। घाट पर इंजीनियर दिव्य कुमार मिश्र और उनकी पत्नी साक्षी के शव एक चिता पर रखे गए। दूसरी पर उनकी दो बहनें दिव्या और दीपिका के शव रखे गए। चचेरे भाई अर्पित और ममेरी बहन ज्योति के शव अलग-अलग चिता पर रखे गए। प्रेमचंद्र मिश्र ने बेटे, बहू और दोनों बेटियों के अलावा भतीजे अर्पित को मुखाग्नि दी। ज्योति की चिता में उसके पिता सूर्यभान पांडेय ने आग लगाई। छहों चिताएं जलने लगीं तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। हर ओर सिसकियां ही सिसकियां गूंजतीं रहीं। किसी तरह लोगों ने अंतिम संस्कार कर घरों को वापसी की। पूरे क्षेत्र में काल के उस समय की ही चर्चा रही जब हंसता-खिलखिलाता परिवार दो मिनट में उजड़ गया।
फोटो...
हे ईश्वर! किस गुनाह की दे दी इतनी बड़ी सजा
रायबरेली में हुए हादसे में एक ही परिवार के छह की हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती।
इंसान का दर्द जब पराकाष्ठा पार कर जाए तो शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं होता। कुछ ऐसा ही मंजर सोमवार को बेलवाडाड़ गांव में देखा गया। जहां के सब इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र मिश्र परिवार के छह लोगों का दाह संस्कार करके कुछ देर पहले ही लौटे।
घर पर मौजूद तमाम सगे-संबंधियों की भीड़ रही। सबने सोचा कि अभी दहाड़ेें मारकर रोएंगे लेकिन उनका चेहरा ऐसा सख्त नजर आया कि कोई बोलने तक की हिम्मत नहीं कर सका। यहां तक कि सांत्वना देने तक की शक्ति किसी में नहीं थी। रविवार रात करीब 12 बजे का वक्त रहा होगा जब छहों शव बेलवाडाड़ लाए गए। इनमें इंजीनियर पंकज, उनकी पत्नी साक्षी के अलावा बहन दिव्या और दीपिका के अलावा चचेरे भाई अर्पित और ममेरी बहन ज्योति के शव थे। हरदोई में शिक्षक देवेश कुमार पांडेय जो इंजीनियर पंकज के ससुर हैं। सोमवार की सुबह सबसे पहले पहुंच गए। वह किनारे पड़ी एक कुर्सी पर बदहवास बैठ गए। प्रेमचंद्र मिश्र उनके पास गए और यही कहकर बिलखने लगे कि ईश्वर की क्या नाराजगी थी, कि एक साथ मेरे सभी बच्चों को उठा लिया।
ज्योति और अर्पित को खींच लाई मौत
इंजीनियर की ममेरी बहन ज्योति और चचेरे भाई अर्पित के विंध्याचल जाने का कोई प्लान नहीं था लेकिन साथ पाकर चल पड़े। इंदिरानगर स्थित घर से निकलने के आधे घंटे बाद इनकी दीपिका से बात हुई तो उसने बताया कि कार पीजीआई पार कर चुकी है। कुछ ही देर बाद हरदोई से समधन यानी साक्षी की मां सुरेखा मिश्रा का फोन आया। प्रेमचंद्र मिश्र ने जब विंध्याचल जाने की बात बताई तो समधन ने एक्सीडेंट होने की जानकारी दी। उन्हें साक्षी के मोबाइल पर कॉल आने से जानकारी हुई थी। खबर मिलते ही लगभग सात बजे प्रेमचंद्र मिश्र बछरांवा पहुंचे। देखा कि सभी लाश में तब्दील हो चुके थे। गाड़ी से निकाल कर सभी शव लिटाए गए थे।
मेरे पास न होते तो बच जाते दोनों
प्रेमचंद्र मिश्र का कहना है कि सातवीं में पढ़ने वाले भतीजे अर्पित और रिश्तेदार की बेटी ज्योति उनके पास न पढ़ रहे होते तो बच गए होते। मिश्र का कहना है कि पंकज पर परिवार का दारोमदार था। बड़ी बेटी दिव्या एमए पास कर चुकी थी। दूसरी बेटी शालू उर्फ दीपिका ने भी इसी वर्ष नेट क्वालीफाई किया था। बहू भी केजीएमसी में नर्सिंग में डिग्री ले चुकी थी। समय का चक्कर ऐसा चला कि बेटे, बहू, दो बेटियों तथा भाई के बेटे की चिता में आग लगाना पड़ा।
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रायबरेली में हुआ था हादसा
लखनऊ के श्रुति बिहार निवासी दरोगा प्रेमचंद्र मिश्र के बेटे नोएडा में रहने वाले बेटे दिव्य कुमार उर्फ पंकज मिश्र दीपावली की छुट्टी में पिता के पास लखनऊ आए थे। रविवार तड़के लखनऊ से कार में सवार होकर वे विंध्याचल धाम जा रहे थे। साथ में पत्नी साक्षी, बहन दिव्या और दीपिका, चचेरा भाई अर्पित और मामा सूर्यभान पाण्डेय की बेटी ज्योति भी थी। रायबरेली जिले के बछरावां थाना क्षेत्र में एनएच-24बी पर कार दुर्घटना में सभी छह सदस्यों की मौत हो गई थी। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के प्रेमचंद्र के सबसे बड़े भाई कमल नयन मिश्र शिक्षक हैं।
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