अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक हर्ष अग्रवाल ने हत्या के जुर्म में चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। इन चारों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक आरोपी पर दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। चारों में से एक को आर्म्स एक्ट में दोषी मानते हुए पांच हजार रुपये अतिरिक्त अर्थदंड अदा करना होगा। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि में से बीस हजार रुपये मृतक के पिता को दिया जाएगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामानुज भाष्कर ने घटना का कोर्ट में विवरण रखा। बताया कि दुबौलिया क्षेत्र के पदमापुर निवासी मुंशीराम ने 28 फरवरी 2012 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में मुंशीराम ने कहा कि वह सुबह बस्ती जाने के लिए सैनिया चौराहे पर खड़ा था। साथ में छोटा बेटा फौजदार व बड़े पुत्र बालमुकुंद के ससुर रामवृक्ष भी थे। इसी बीच डेयरी से दूध पहुंचाने उसी चौराहे पर बड़ा बेटा बाल मुकुंद भी आ गया। इसी बीच गोली चलने की आवाज हुई तो हम लोग वहां पहुंच गए, देखा कि बालमुकुंद को दुबौलिया थाना क्षेत्र निवासी राज नरायन यादव उर्फ रानू, ठिकरिया निवासी अमर शर्मा व कलवारी थाना क्षेत्र के प्रधानपुर गांव निवासी रमेश चौधरी व तीन अज्ञात युवक स्टंप से मार रहे थे। जब बालमुकुंद जान बचाने के लिए भागने लगा तो इसी बीच राजनरायन ने तमंचे से फायर कर दिया, जिससे गोली उसके सिर में घुस गई। मौके पर ही बालमुकुंद की मौत हो गई। रिपोर्ट के आधार पर चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। जबकि राजनरायन की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद किया। इसका भी शस्त्र अधिनियम में मुकदमा दर्ज हुआ। साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने चारों को उक्त सजा सुनाई।
मंडी सचिव को देनी होगी 2.08 लाख क्षतिपूर्ति
बस्ती।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रामदरश, सदस्य महादेव प्रसाद दूबे व शोभा मित्रा ने कृषक महिला की हुई मौत के मामले किसान दुर्घटना बीमा का लाभ दिए जाने का आदेश दिया है। इस मामले में मंडी समिति के सचिव को 2.08 लाख रुपये अदा करने के निर्देश दिए हैं।
पैकोलिया थाना क्षेत्र के इटवा खजुरी गांव निवासी किसान ओमप्रकाश आदि ने परिवाद दाखिल किया कि परिवार की सदस्य देवमति पर खेती करते समय भैंस ने हमला कर दिया। इस दुर्घटना में उसे गंभीर चोट आई। इसी चोट के चलते उसकी मौत 30 नवंबर 2015 को लखनऊ में इलाज के दौरान हो गई। सरकार की योजना के मुताबिक मृतक के आश्रितों को दो लाख रुपये दिए जाने प्रावधान है, मगर इस मामले में सभी अभिलेख देने के बावजूद भी मंडी समिति ने मुआवजे का भुगतान नहीं किया। फोरम ने विभाग की सेवा में कमी मानते हुए मानसिक कष्ट व वाद व्यय के रूप में आठ हजार तो योजना के लाभ के रूप में दो लाख देने का आदेश दिया है।